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सीबीआई ने डिजिटल अरेस्ट ठगी के खिलाफ चलाया बड़ा अभियान, 22 ठिकानों पर छापेमारी

सीबीआई ने डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगी करने वाले साइबर अपराधियों के खिलाफ एक बड़ा अभियान चलाया है। ऑपरेशन चक्र-6 के तहत, 10 राज्यों में 22 ठिकानों पर छापेमारी की गई, जिसमें दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। जांच में कई महत्वपूर्ण साक्ष्य मिले हैं, जिनसे ठगी के नेटवर्क का पता लगाने में मदद मिलेगी। सीबीआई ने नागरिकों को चेतावनी दी है कि कोई भी सरकारी एजेंसी डिजिटल अरेस्ट नहीं करती और ऐसे कॉल आने पर तुरंत संपर्क काटने की सलाह दी है।
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नई दिल्ली में साइबर अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई


नई दिल्ली: केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने डिजिटल अरेस्ट के नाम पर लोगों को ठगने वाले साइबर अपराधियों के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कार्रवाई की है। ऑपरेशन चक्र-6 के तहत, सीबीआई ने 10 राज्यों में 22 स्थानों पर एक साथ छापेमारी की, जिसमें गुजरात के 11.42 करोड़ रुपये के डिजिटल अरेस्ट मामले में दो संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान हिमांशु प्रसाद और यूनिस बिस्वास के रूप में हुई है। जांच में पता चला है कि इन अपराधियों ने पीड़ित को लगभग तीन महीने तक 'डिजिटल अरेस्ट' में रखा और खुद को पुलिस और भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) के अधिकारी बताकर उनसे पैसे की मांग की।


तलाशी में महत्वपूर्ण साक्ष्य मिले


सीबीआई ने बताया कि वित्तीय लेनदेन और तकनीकी विश्लेषण के आधार पर की गई छापेमारी में बैंकिंग दस्तावेज, खातों से जुड़े रिकॉर्ड, डिजिटल उपकरण और अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य बरामद किए गए हैं। इन साक्ष्यों की फोरेंसिक जांच की जा रही है ताकि डिजिटल अरेस्ट के पीछे के पूरे नेटवर्क का पता लगाया जा सके। गिरफ्तार आरोपियों की भूमिका ठगी की रकम को प्राप्त करने और उसे विभिन्न खातों में स्थानांतरित करने में रही है। सीबीआई के अनुसार, हेक्साक्वेस्ट ग्लोबल प्राइवेट लिमिटेड के बैंक खाते के माध्यम से ठगी की रकम में से लगभग 2.5 करोड़ रुपये प्राप्त हुए थे।


संदिग्ध चैट और एपीके फाइलों के सबूत


तलाशी के दौरान बरामद डिजिटल उपकरणों में कई संदिग्ध चैट, संदेश और दस्तावेज भी मिले हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों ने बैंक खातों का उपयोग करते हुए एपीके फाइलों के माध्यम से डिजिटल अरेस्ट और अन्य साइबर अपराधों से प्राप्त रकम को निकालने का प्रयास किया। सीबीआई अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य संदिग्धों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए प्रयासरत है।


पिछले 30 दिनों में व्यापक अभियान


सीबीआई ने बताया कि डिजिटल अरेस्ट से संबंधित चार मामलों में पिछले 30 दिनों में 22 राज्यों में 142 स्थानों पर छापेमारी की गई और 17 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इस कार्रवाई का उद्देश्य ठगी की रकम के प्रवाह का पता लगाना और नेटवर्क के संचालकों तथा लाभार्थियों तक पहुंचना है।


डिजिटल अरेस्ट की कोई सरकारी प्रक्रिया नहीं


सीबीआई ने नागरिकों को चेतावनी दी है कि कोई भी सरकारी एजेंसी, जैसे पुलिस या सीबीआई, किसी व्यक्ति को फोन या वीडियो कॉल के माध्यम से 'डिजिटल अरेस्ट' नहीं करती और न ही पैसे की मांग करती है। ऐसे कॉल आने पर तुरंत संपर्क काटें और राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 या आधिकारिक वेबसाइट पर इसकी सूचना दें।