सोनम वांगचुक की पत्नी ने हाईकोर्ट में दायर की याचिका, निजी अस्पताल में स्थानांतरण की मांग
दिल्ली हाईकोर्ट में मामला पहुंचा
नई दिल्ली: जलवायु परिवर्तन के लिए सक्रिय सोनम वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल में भर्ती किए जाने के बाद उनकी पत्नी गीतांजलि आंगमो ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। उन्होंने अदालत से अनुरोध किया है कि वांगचुक को सरकारी अस्पताल से किसी निजी अस्पताल में स्थानांतरित किया जाए। उनका कहना है कि अब उन्हें सफदरजंग अस्पताल की चिकित्सा प्रणाली पर भरोसा नहीं रहा और वांगचुक को उनकी पसंद के अस्पताल में इलाज कराने की अनुमति दी जानी चाहिए। इस घटनाक्रम ने अस्पताल में भर्ती होने के बाद एक नया कानूनी और राजनीतिक मोड़ ले लिया है।
याचिका में तात्कालिक सुनवाई की मांग
गीतांजलि आंगमो ने अपनी याचिका पर तात्कालिक सुनवाई की अपील की है। याचिका में उल्लेख किया गया है कि सोनम वांगचुक पिछले 21 दिनों से जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण भूख हड़ताल कर रहे थे, लेकिन उन्हें जबरन अस्पताल में भर्ती किया गया। याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि उन्हें उनकी इच्छा के खिलाफ अस्पताल में रखा गया है। अदालत से अनुरोध किया गया है कि उनकी अस्पताल में मौजूदगी को अवैध और असंवैधानिक घोषित किया जाए, जो संविधान के अनुच्छेद 19 और 21 के तहत मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।
रिहाई और निजी अस्पताल में स्थानांतरण की मांग
याचिका में अदालत से यह भी अनुरोध किया गया है कि सोनम वांगचुक को तुरंत अस्पताल से रिहा किया जाए या उन्हें उनकी पसंद के किसी निजी अस्पताल में भर्ती होने की अनुमति दी जाए। परिवार का आरोप है कि अस्पताल में भर्ती होने के बाद से वांगचुक को उनके वकील और उन डॉक्टरों से मिलने की इजाजत नहीं दी गई, जो लंबे समय से उनके स्वास्थ्य की देखरेख कर रहे थे। इससे उनकी चिकित्सकीय देखभाल और कानूनी अधिकार दोनों प्रभावित हुए हैं।
पोटेशियम स्तर को लेकर उठाए सवाल
गीतांजलि आंगमो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भी अस्पताल की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि अस्पताल ने परिवार को बताया था कि सोनम वांगचुक के शरीर में पोटेशियम का स्तर 2.9 तक गिर गया है, जिसे गंभीर स्थिति माना जाता है। हालांकि, उनका आरोप है कि अस्पताल की ओर से जारी सार्वजनिक स्वास्थ्य बुलेटिन में केवल पोटेशियम स्तर कम होने की बात कही गई, लेकिन वास्तविक आंकड़ा साझा नहीं किया गया। इससे परिवार के मन में संदेह पैदा हुआ।
I have lost faith in Safdarjung Government Hospital.
— Gitanjali J Angmo (@GitanjaliAngmo) July 19, 2026
The hospital told us @Wangchuk66’s potassium had dropped to 2.9, describing it as alarming and life-threatening. Yet, in its public health bulletin, it conveniently omitted the actual number, referring only to "decreasing…
स्वतंत्र जांच में अलग दावा
आंगमो के अनुसार, परिवार को कई घंटों के अनुरोध के बाद वांगचुक का रक्त नमूना स्वतंत्र जांच के लिए देने की अनुमति मिली। उनका दावा है कि निजी प्रयोगशाला की रिपोर्ट में पोटेशियम का स्तर 3.5 आया, जिसे सामान्य सीमा में बताया गया। इसी आधार पर उन्होंने अस्पताल की रिपोर्ट और इलाज की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि दोनों रिपोर्टों में अंतर है तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
अस्पताल छोड़ने की अनुमति नहीं मिलने का आरोप
गीतांजलि आंगमो ने यह भी आरोप लगाया कि परिवार की ओर से कई बार अनुरोध किए जाने के बावजूद अस्पताल प्रशासन ने वांगचुक को डिस्चार्ज करने या किसी निजी अस्पताल में स्थानांतरित करने की अनुमति नहीं दी। उन्होंने दावा किया कि अस्पताल परिसर में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात हैं, जिससे परिवार के सदस्यों की आवाजाही और मुलाकातों में भी कठिनाई हो रही है। उनके अनुसार, यह स्थिति सामान्य चिकित्सा देखभाल जैसी नहीं बल्कि प्रतिबंधात्मक माहौल जैसी प्रतीत होती है।
"यह इलाज नहीं, अवैध हिरासत है"
अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में आंगमो ने कहा कि यदि वांगचुक की तबीयत और बिगड़ती है तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों और प्रशासन की होगी। उन्होंने इस पूरी स्थिति को "अवैध हिरासत" करार देते हुए अदालत से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि वांगचुक को जल्द से जल्द ऐसे अस्पताल में स्थानांतरित किया जाना चाहिए, जहां परिवार को इलाज की प्रक्रिया पर भरोसा हो और स्वतंत्र चिकित्सा देखभाल उपलब्ध हो सके।
अस्पताल ने पहले क्या कहा था?
इससे पहले सफदरजंग अस्पताल की ओर से जारी स्वास्थ्य अपडेट में बताया गया था कि लंबे समय तक भूख हड़ताल और शरीर में पानी की कमी के कारण सोनम वांगचुक कमजोर हो गए हैं। हालांकि अस्पताल ने उनकी हालत स्थिर बताते हुए कहा था कि उन्हें लगातार चिकित्सकीय निगरानी और आवश्यक उपचार की जरूरत है। अब इस मामले में अदालत के रुख पर सभी की नजरें टिकी हैं। यदि हाईकोर्ट याचिका पर सुनवाई करता है, तो यह तय होगा कि वांगचुक का इलाज सरकारी अस्पताल में जारी रहेगा या उन्हें किसी निजी अस्पताल में स्थानांतरित करने की अनुमति दी जाएगी।
