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स्टेम सेल थेरेपी पर केंद्र सरकार का सख्त रुख: ऑटिज्म के इलाज में नहीं होगा अप्रमाणित उपचार

केंद्र सरकार ने स्टेम सेल थेरेपी के उपयोग को लेकर सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिसमें ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर के लिए अप्रमाणित उपचार पर रोक लगाई गई है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि केवल स्वीकृत चिकित्सकीय परीक्षणों में ही स्टेम सेल का उपयोग किया जा सकेगा। नियमों का उल्लंघन करने पर गंभीर कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। जानें इस महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश के बारे में और क्या हैं इसके प्रभाव।
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केंद्र सरकार का नया दिशा-निर्देश


नई दिल्ली: स्टेम सेल थेरेपी के नाम पर चल रहे अवैज्ञानिक उपचारों और व्यावसायिक दावों के खिलाफ केंद्र सरकार ने कड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि स्टेम सेल थेरेपी का उपयोग केवल उन बीमारियों और चिकित्सकीय स्थितियों में किया जा सकेगा, जिन्हें मंत्रालय ने मान्यता दी है।


ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर पर स्पष्टता

16 सितंबर को जारी सलाह में मंत्रालय ने ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (एएसडी) के इलाज में स्टेम सेल के उपयोग को लेकर स्थिति स्पष्ट की है। एएसडी के लिए किसी भी प्रकार की स्टेम सेल थेरेपी को नियमित चिकित्सा सेवा के रूप में नहीं दिया जा सकेगा। इसका उपयोग केवल उन क्लिनिकल परीक्षणों तक सीमित रहेगा, जिन्हें आवश्यक नियामकीय मंजूरी प्राप्त है।


सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का पालन

इलाज वही, जिस पर मुहर सही


मंत्रालय ने राज्यों को निर्देश दिया है कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों को सभी संबंधित राज्य और जिला नियामक प्राधिकरणों, सरकारी और निजी चिकित्सा संस्थानों तक पहुंचाया जाए। स्टेम सेल से जुड़े शोध और उपचार के लिए नियमों का पालन अनिवार्य होगा। यह सलाह सर्वोच्च न्यायालय के यश चैरिटेबल ट्रस्ट बनाम भारत संघ मामले में दिए गए फैसले के बाद जारी की गई है।


व्यावसायिक इलाज पर रोक

ऑटिज्म के नाम पर व्यावसायिक इलाज पर रोक


सरकार ने स्पष्ट किया है कि ऑटिज्म के मामलों में अप्रमाणित स्टेम सेल उपचार को नियमित चिकित्सा सेवा के रूप में नहीं पेश किया जा सकता। ऐसे उपचार केवल स्वीकृत चिकित्सकीय परीक्षणों के नियमों के तहत ही किए जा सकेंगे। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद और जैव प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करना आवश्यक है।


नियमों का उल्लंघन गंभीर परिणाम ला सकता है

नियम तोड़ा तो कार्रवाई तय


मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि नियमों का उल्लंघन करने पर संबंधित चिकित्सकों और संस्थानों को गंभीर दंड का सामना करना पड़ सकता है। सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के अनुसार, वैधानिक प्रावधानों का पालन न करने पर पेशेवर कदाचार के साथ-साथ चिकित्सा प्रतिष्ठानों के पंजीकरण को रद्द करने और जुर्माने जैसी कार्रवाई भी हो सकती है। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग ने भी 5 सितंबर 2026 को जारी सलाह में कहा है कि स्टेम सेल थेरेपी को केवल स्वीकृत रोगों में ही दिया जा सकता है।