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स्वामी हरिदास संगीत महोत्सव: ब्रज की भक्ति और संगीत का अद्भुत संगम

स्वामी हरिदास संगीत एवं नृत्य महोत्सव का भव्य उद्घाटन वृंदावन में हुआ, जिसमें छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रामेन डेका ने दीप प्रज्वलित कर इस महोत्सव की शुरुआत की। इस अवसर पर ब्रज की भक्ति परंपरा और शास्त्रीय संगीत की अद्भुत छटा देखने को मिली। विधायक श्रीकांत शर्मा ने स्वामी हरिदास जी की सुर साधना की सराहना की। महोत्सव में कथक नृत्य, संतूर-सितार जुगलबंदी और कई अन्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ शामिल थीं। गणमान्यजन और संगीत प्रेमियों की बड़ी संख्या ने इस महोत्सव को सफल बनाया।
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महान संगीत महोत्सव का उद्घाटन


वृंदावन: रमणरेती में वन महाराज कॉलेज के हरितिमा से भरे परिसर में शुक्रवार को स्वामी हरिदास संगीत एवं नृत्य महोत्सव का भव्य उद्घाटन हुआ। छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रामेन डेका ने स्वामी हरिदास जी के चित्र के समक्ष दीप जलाकर और पुष्प अर्पित कर इस महोत्सव की शुरुआत की। इस अवसर पर ब्रज की भक्ति परंपरा, शास्त्रीय संगीत और नृत्य की अद्भुत छटा देखने को मिली।


राज्यपाल का श्रद्धांजलि

राज्यपाल रामेन डेका ने स्वामी हरिदास को नमन करते हुए कहा: 'यह पवित्र भूमि भगवान श्रीकृष्ण और राधारानी के विचरण का स्थल है, जहां भक्ति स्वयं नृत्य करती है। कई संतों ने वृंदावन को अपनी साधना का केंद्र बनाया। स्वामी हरिदास महाराज ब्रज की भक्ति परंपरा के महान विभूति थे, जिन्होंने श्रीकृष्ण का अलौकिक साक्षात्कार किया और अपनी स्वर साधना से श्रीराधाकृष्ण के स्वरूप को प्रकट किया। उनके प्रति श्रद्धांजलि अर्पित करना सभी संगीतज्ञों के लिए गर्व की बात है।'


विधायक का संबोधन

विधायक श्रीकांत शर्मा ने कहा: 'स्वामी हरिदास जी की सुर साधना से प्रकट ठाकुर बांकेबिहारी जी हमारे लिए अनमोल उपहार हैं। इस पावन भूमि पर आना राधारानी की कृपा से ही संभव है। महोत्सव के पहले दिन गायन, वादन और नृत्य की त्रिवेणी का प्रवाह हुआ।' उन्होंने बनारस घराने के प्रतिष्ठित कथक नृत्यकार विशाल कृष्ण की प्रस्तुति की सराहना की, जिन्होंने श्रीराधा-कृष्ण के मिलन की लीला का भावपूर्ण मंचन किया।


कथक और नृत्य की मनोहारी प्रस्तुतियाँ

महारास और थाली नृत्य: इसके बाद, श्रीकृष्ण के गोपियों के प्रति प्रेम का प्रतीक महारास का कथक के माध्यम से मनोहारी प्रदर्शन किया गया। कलाकारों ने पारंपरिक थाली नृत्य की प्रस्तुति देकर दर्शकों से तालियाँ बटोरीं। कार्यक्रम का समापन कथक की भाव-भंगिमाओं के साथ हुआ, जिसमें श्रीकृष्ण ने राधारानी को बांसुरी की तान से रिझाया।


सांस्कृतिक संध्या का आयोजन

संतूर-सितार जुगलबंदी: सांस्कृतिक संध्या में मध्यप्रदेश की बहनें संस्कृति और प्रकृति ने संतूर और सितार की जुगलबंदी पेश की, जिससे संगीत प्रेमी मंत्रमुग्ध हो गए। इसके बाद, स्वामी हरिदास संगीत अकादमी के निर्देशक अजित सिंह के निर्देशन में कलाकारों ने कथक नृत्य की बारीकियों का प्रदर्शन किया।


गणमान्यजन और संगीत प्रेमियों की उपस्थिति

कार्यक्रम में शामिल हुए गणमान्य लोग: इस महोत्सव में ब्रज विभूति संत मौनी बाबा महाराज, संत कमंडल वाले बाबा, पूर्व विधायक प्रदीप माथुर, महेश अग्रवाल, सुनील नागर, और अन्य कई गणमान्यजन और संगीत प्रेमी उपस्थित रहे।