हरपाल सिंह चीमा का भाजपा पर हमला: ग्रामीण रोजगार योजना में बदलाव से गरीबों को हुआ नुकसान
चंडीगढ़ में हरपाल सिंह चीमा का बयान
चंडीगढ़: आम आदमी पार्टी (आप) के प्रमुख नेता और वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने शनिवार को ग्रामीण रोजगार योजना में किए गए परिवर्तनों को लेकर भाजपा की केंद्र सरकार पर तीखा आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इस बदलाव ने देश के गरीबों, दलितों और श्रमिकों के लिए रोजगार के अवसरों को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। चीमा ने कहा कि हालिया आंकड़ों ने उनकी चिंताओं को सही साबित किया है, जब इस योजना का नाम बदलकर वीबी-जीराम-जी रखा गया था।
योजना में बदलाव की सच्चाई
सिर्फ नाम नहीं, योजना के अंग भी बदले गए: एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में चीमा ने कहा कि भाजपा ने बार-बार यह दावा किया कि केवल योजना का नाम बदला गया है, जबकि वास्तविकता यह है कि कई महत्वपूर्ण तत्वों को बदल दिया गया है जो रोजगार सृजन में सहायक थे। अब यह स्पष्ट हो गया है कि भाजपा सरकार ने गरीबों और श्रमिकों के रोजगार पर गंभीर चोट की है।
दिहाड़ी रोजगार में कमी
9.56 करोड़ कम दिहाड़ी रोजगार पैदा हुआ: उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष की तुलना में इस योजना के तहत लगभग 9.56 करोड़ कम दिहाड़ी रोजगार उत्पन्न हुआ है। पिछले साल लगभग 30 करोड़ दिहाड़ी रोजगार था, जो अब घटकर लगभग 20.4 करोड़ रह गया है, जो ग्रामीण श्रमिकों के लिए रोजगार में एक बड़ी कमी को दर्शाता है।
दलित और पिछड़े वर्गों पर प्रभाव
दलित और पिछड़े वर्गों पर पड़ा सबसे ज्यादा असर: मंत्री ने कहा कि इसका सबसे अधिक प्रभाव दलित और पिछड़े वर्गों पर पड़ा है। इस योजना के तहत लगभग 87% श्रमिक अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) समुदायों से हैं, और भाजपा के बदलाव ने इन्हें और हाशिए पर धकेल दिया है।
भाजपा का वादा अधूरा
125 दिन रोजगार का वादा अधूरा रहा: हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि भाजपा ने इस योजना के तहत रोजगार के अवसर बढ़ाकर 125 दिन करने का वादा किया था, लेकिन इसके बजाय सरकार ने श्रमिकों के लिए दिहाड़ी की संख्या घटा दी है।
भाजपा के खिलाफ आरोप
भाजपा गरीबों और दलितों के हितों के खिलाफ: चीमा ने कहा कि ये आंकड़े स्पष्ट रूप से दिखाते हैं कि भाजपा सरकार दलितों, गरीबों और श्रमिकों को रोजगार से वंचित कर रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा ने योजना का नाम तो बदला, लेकिन इसके तत्वों को भी बदलकर रोजगार को कमजोर कर दिया है।
