Newzfatafatlogo

हरियाणा में फुटवियर शोरूम को मिला बड़ा झटका, कैरी बैग के लिए वसूले गए पैसे लौटाने का आदेश

हरियाणा के रोहतक में एक फुटवियर शोरूम द्वारा कैरी बैग के लिए अतिरिक्त शुल्क लेने का मामला उपभोक्ता आयोग तक पहुंचा। आयोग ने कंपनी को न केवल बैग के पैसे लौटाने का आदेश दिया, बल्कि 4,000 रुपये मुआवजा भी देने का निर्देश दिया। यह निर्णय उपभोक्ताओं के अधिकारों को सशक्त बनाने वाला माना जा रहा है। जानिए इस मामले की पूरी कहानी और इसके पीछे की वजहें।
 | 
हरियाणा में फुटवियर शोरूम को मिला बड़ा झटका, कैरी बैग के लिए वसूले गए पैसे लौटाने का आदेश

चंडीगढ़ में उपभोक्ता आयोग का फैसला


चंडीगढ़: हरियाणा के रोहतक में एक फुटवियर शोरूम द्वारा कैरी बैग के लिए अतिरिक्त शुल्क लेने का मामला अब उपभोक्ता आयोग के समक्ष पहुंच गया है। आयोग ने कंपनी को न केवल बैग के पैसे लौटाने का आदेश दिया है, बल्कि मुआवजा भी देने का निर्देश दिया है। यह निर्णय एक ग्राहक की शिकायत के बाद लिया गया, जिसने इस मुद्दे को उठाया। आइए जानते हैं इस मामले की पूरी कहानी।


मामले का विवरण

यह मामला 2023 का है, जब एक युवक ने रोहतक में एक प्रसिद्ध फुटवियर ब्रांड के शोरूम से जूते खरीदे। खरीदारी के दौरान, बिल में कैरी बैग के लिए 10 रुपये का अतिरिक्त शुल्क जोड़ा गया। ग्राहक ने इस पर आपत्ति जताते हुए मुफ्त बैग की मांग की, लेकिन शोरूम के कर्मचारियों ने कंपनी की नीति का हवाला देकर मना कर दिया।


इसके बाद, ग्राहक ने उपभोक्ता आयोग का रुख किया और शिकायत की कि उत्पाद खरीदने के बाद उसे सुरक्षित रूप से घर ले जाने की जिम्मेदारी विक्रेता की होती है, और इसके लिए अलग से शुल्क लेना अनुचित है। ग्राहक ने इसे अनुचित व्यापारिक व्यवहार मानते हुए मुआवजे की मांग की।


कंपनी का तर्क

सुनवाई के दौरान, कंपनी ने तर्क दिया कि कैरी बैग पर शुल्क लेने का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना और प्लास्टिक बैग के उपयोग को कम करना है। कंपनी ने यह भी कहा कि ग्राहक चाहें तो अपना बैग लाने का विकल्प चुन सकते हैं और बैग खरीदना पूरी तरह से वैकल्पिक था।


हालांकि, आयोग ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह निष्कर्ष निकाला कि ग्राहक से बैग के लिए अलग से पैसे लेना उचित नहीं था। आयोग ने इसे सेवा में कमी और अनुचित व्यापारिक व्यवहार माना और कंपनी को 10 रुपये वापस करने के साथ-साथ 4,000 रुपये मुआवजा और 4,000 रुपये मुकदमे के खर्च के रूप में देने का आदेश दिया। यह निर्णय उपभोक्ताओं के अधिकारों को सशक्त बनाने वाला माना जा रहा है, जिसके चलते यह मामला चर्चा का विषय बन गया है।