हरियाणा में राकेश दलाल का तीखा सवाल: 2016 की हिंसा का जिम्मेदार कौन?
हरियाणा में राकेश दलाल का सवाल
हिसार: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अगुवाई में हरियाणा के करनाल में 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' पदयात्रा के दौरान, प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता राकेश दलाल ने केंद्र और राज्य सरकार से कई महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण, अवैध खनन के खिलाफ चलाए गए अभियानों और खजुराहो के ऐतिहासिक मंदिरों की धरोहर के संरक्षण के लिए किए गए प्रयासों का उल्लेख किया। दलाल ने प्रेस विज्ञप्ति में 2016 के जाट आंदोलन के दौरान हुई हिंसा और उसकी जांच प्रक्रिया पर जवाबदेही की मांग की है।
2016 की हिंसा पर राकेश दलाल का सवाल
राकेश दलाल ने पूछा कि जिस सरकार ने आज प्रदेश में अराजकता समाप्त करने और लोकतंत्र की रक्षा का नारा दिया है, वह पहले यह स्पष्ट करे कि 2016 में हरियाणा में हुई हिंसा का असली जिम्मेदार कौन था? उनके अनुसार, उस आंदोलन के दौरान प्रदेश को 34 हजार करोड़ रुपये से अधिक का आर्थिक नुकसान हुआ और 35 से ज्यादा लोगों की जान गई। उन्होंने रोहतक में तत्कालीन कैबिनेट मंत्री के आवास पर आगजनी की कोशिश का भी जिक्र किया।
10 साल की CBI जांच के बाद भी नहीं मिला जवाब
दलाल ने कहा कि इस गंभीर मामले की जांच हरियाणा सरकार की सिफारिश पर सीबीआई को सौंपी गई थी। लगभग 10 साल तक चली जांच और 127 गवाहों की गवाही के बावजूद, फरवरी 2026 में विशेष सीबीआई अदालत ने सबूतों के अभाव में 56 मुख्य आरोपियों को बरी कर दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि इतने लंबे समय तक चली जांच के बाद भी अदालत में आरोप साबित नहीं हो सके, तो इसके लिए जिम्मेदारी किसकी है? क्या यह जांच एजेंसियों की विफलता थी या मामले को ठंडा करने की कोशिश की गई?
90 से अधिक अधिकारियों की भूमिका पर भी उठाए सवाल
सामाजिक कार्यकर्ता ने प्रकाश सिंह कमेटी की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि रिपोर्ट में 90 से अधिक वरिष्ठ आईएएस और आईपीएस अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाए गए थे। उन्होंने पूछा कि जब प्रदेश में हिंसा का माहौल था, तब जिम्मेदारी निभाने में विफल अधिकारियों के खिलाफ क्या ठोस कार्रवाई की गई? केवल तबादलों तक कार्रवाई क्यों सीमित रही?
प्रचार और जमीनी हकीकत में अंतर का आरोप
राकेश दलाल ने प्रदेश में विकास के दावों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने हिसार के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के नाम पर सीमित एयरोड्रम संचालन और कानून-व्यवस्था की स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार के दावों और जमीनी हकीकत के बीच बड़ा अंतर है। जनता को केवल घोषणाएं नहीं, बल्कि धरातल पर परिणाम चाहिए।
न्याय और जवाबदेही से ही मजबूत होगा लोकतंत्र
राकेश दलाल ने कहा कि लोकतंत्र केवल रैलियों और नारों से मजबूत नहीं होता, बल्कि इसकी असली ताकत न्याय, पारदर्शिता और जवाबदेही में होती है। जब तक पीड़ितों को न्याय और दोषियों को सजा नहीं मिलेगी, तब तक लोकतंत्र बचाने के दावे अधूरे रहेंगे। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से सवाल किया कि 2016 की हिंसा, प्रशासनिक विफलता और जांच के नतीजों पर सरकार जनता को कब स्पष्ट जवाब देगी?
