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हरियाणा में श्रीमद् भागवत कथा: भगवान श्रीकृष्ण और शंकर जी का अद्भुत प्रसंग

हरियाणा के श्रीकृष्ण गौशाला में आयोजित भागवत कथा में आचार्य राम सेवक शास्त्री जी ने भगवान श्रीकृष्ण और शंकर जी के अद्भुत प्रसंग का वर्णन किया। कथा के दौरान श्रद्धालुओं को धर्म शास्त्रों के महत्व और सही कर्म करने की प्रेरणा दी गई। इस धार्मिक आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए और आचार्य जी से आशीर्वाद लिया। जानें इस कथा के विशेष प्रसंग और आचार्य जी के विचार।
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श्रीकृष्ण गौशाला में भागवत कथा का आयोजन


हरियाणा: श्रीकृष्ण गौशाला रतिया में संत बाबा बाबू राम जी दुगाल वाले और संत बाबा कर्म चंद जी बच्चुआना वालों की कृपा से, तथा संत शिरोमणि श्री नारायण मुनि जी के आशीर्वाद से, गौ सेवा हेतु पितृ पक्ष में श्रीमद् भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में उपस्थित श्रद्धालुओं को व्यास पीठ पर आचार्य श्री राम सेवक शास्त्री जी कालवाणु वाले ने कथा सुनाई। उन्होंने पांचवे दिन बाल श्री कृष्ण जी और भगवान शंकर जी के प्रसंग का वर्णन किया। आचार्य जी ने बताया कि भगवान शंकर जी कैलाश पर्वत से पृथ्वी पर बाल श्री कृष्ण जी के दर्शन के लिए आए थे। उनके द्वारा गाए गए भजन "मईया दर्श करादे नंदलाल दे योगी आया दुरो चल के" ने श्रद्धालुओं को भावुक कर दिया।


हरियाणा में श्रीमद् भागवत कथा: भगवान श्रीकृष्ण और शंकर जी का अद्भुत प्रसंग
Bhagwat Katha JBT/ Rimpi Jindal


धर्म शास्त्रों का महत्व


आचार्य श्री राम सेवक शास्त्री जी ने आगे कहा कि धर्म शास्त्र जीवन में सही और गलत का भेद स्पष्ट करते हैं। ये हमें यह समझने में मदद करते हैं कि बुराई और अच्छाई में क्या अंतर है। उन्होंने बताया कि इंसान को बिना फल की इच्छा के कर्म करना चाहिए, क्योंकि धन और दौलत के बल पर प्रभु को नहीं पाया जा सकता। केवल प्रेम से ही प्रभु की कृपा प्राप्त की जा सकती है। इस अवसर पर श्रीकृष्ण गौशाला कमेटी, महिला मंडल के सभी सदस्य और अन्य धार्मिक एवं सामाजिक संस्थाओं के लोग उपस्थित थे, जिन्होंने शास्त्री जी से आशीर्वाद लिया और भागवत कथा का आनंद लिया।