हरीश रावत का कांग्रेस से इस्तीफा: क्या है चंदन सिंह जीना का मामला?
हरीश रावत का इस्तीफा
नई दिल्ली: उत्तराखंड में विधानसभा चुनावों से पहले, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने पार्टी के दो महत्वपूर्ण पदों से इस्तीफा देने का निर्णय लिया है। यह कदम उनके पूर्व निजी सहायक चंदन सिंह जीना के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई के बाद उठाया गया है। रावत ने अपने फैसले की वजह सोशल मीडिया पर एक विस्तृत नोट के माध्यम से साझा की।
ED की कार्रवाई का कारण
ED की कार्रवाई 2016 में हुई UKSSSC ग्राम पंचायत विकास अधिकारी भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं से संबंधित है। एजेंसी के अनुसार, चंदन सिंह जीना के घर से 32 लाख रुपये नकद, लगभग 200 ग्राम सोना और कई महंगी घड़ियां बरामद की गईं। इसके अलावा, उनके और उनके परिवार के बैंक खातों में जमा 52.16 लाख रुपये की राशि भी फ्रीज कर दी गई है।
जांच एजेंसी ने PMLA के तहत कार्रवाई करते हुए मोबाइल फोन को भी फॉरेंसिक जांच के लिए अपने कब्जे में लिया। ED के अनुसार, जब्त और फ्रीज की गई संपत्तियों की कुल कीमत लगभग 1.28 करोड़ रुपये है।
पार्टी को नुकसान से बचने के लिए इस्तीफा
हरीश रावत ने अपने बयान में कहा कि चंदन सिंह जीना लंबे समय से उनके साथ विभिन्न जिम्मेदारियों में कार्यरत रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि मामले की सच्चाई जांच के बाद सामने आएगी। हालांकि, यदि भर्ती प्रक्रिया में किसी प्रकार की गड़बड़ी के आरोप सही साबित होते हैं, तो वह इससे खुद को शर्मिंदा महसूस करेंगे।
सामने टीवी पर खबर आ रही है कि देहरादून में हरीश रावत के पीए के पास भारी मात्रा में कैश और ज्वैलरी आदि पकड़ी गई या पकड़ाई गई, इस तथ्य का खुलासा तो आने वाले समय में होगा और यह सत्य है कि श्री जीना मेरे ओएसडी रहे हैं और मैं जितने भी पदों पर रहा, चाहे पार्टी में रहा या सरकार में रहा,… pic.twitter.com/Z6rZYcVev0
— Harish Rawat (@harishrawatcmuk) September 11, 2026
रावत ने कहा कि यदि किसी विवाद के कारण कांग्रेस के भ्रष्टाचार विरोधी अभियान को नुकसान होता है, तो वह ऐसा नहीं चाहते। इसी कारण उन्होंने उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी की कार्यकारिणी के सदस्य और कांग्रेस कार्यसमिति के स्थायी आमंत्रित सदस्य के पद से हटने का निर्णय लिया।
भर्ती प्रक्रिया पर स्पष्टीकरण
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके कार्यकाल में युवाओं को रोजगार देने के लिए कई भर्ती बोर्ड स्थापित किए गए थे। उन्होंने दावा किया कि उनके लगभग तीन साल के कार्यकाल में 42 हजार से अधिक सरकारी पदों पर भर्तियां की गईं।
रावत ने यह भी कहा कि यदि किसी भर्ती या परीक्षा में उनकी संलिप्तता के कोई प्रमाण हैं, तो उन्हें जांच एजेंसियों के सामने प्रस्तुत किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि कानून के अनुसार जांच होनी चाहिए और यदि दोष साबित होता है, तो कार्रवाई पर उन्हें कोई आपत्ति नहीं होगी।
