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116 वर्षीय नवनीतम्मा की अद्भुत भक्ति यात्रा: तिरुमला मंदिर तक 11 किलोमीटर की चढ़ाई

116 वर्षीय नवनीतम्मा ने अपनी अद्भुत भक्ति से सभी को प्रेरित किया है। उन्होंने तिरुमला मंदिर तक 11 किलोमीटर की कठिन चढ़ाई पूरी की, जिसमें 3,550 सीढ़ियाँ शामिल थीं। उनके इस साहसिक सफर ने न केवल तीर्थयात्रियों को प्रभावित किया, बल्कि आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री ने भी उनकी सराहना की। टीटीडी ने उन्हें विशेष वीवीआईपी दर्शन का अवसर प्रदान किया। जानें इस अद्भुत यात्रा के बारे में और कैसे नवनीतम्मा ने अपनी आस्था से सभी को प्रेरित किया।
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नवनीतम्मा की भक्ति का अनोखा उदाहरण

तिरुपति: जब किसी के मन में सच्ची श्रद्धा होती है, तो उम्र और शारीरिक कठिनाइयाँ भी उसे रोक नहीं पातीं। 116 वर्षीय नवनीतम्मा ने इस बात को साबित कर दिखाया है। उनकी अटूट भक्ति ने सभी को प्रभावित किया है। इस उम्र में जब चलना भी मुश्किल होता है, नवनीतम्मा ने भगवान वेंकटेश्वर का आशीर्वाद पाने के लिए 11 किलोमीटर लंबी अलीपिरी पैदल यात्रा की। उनकी इस अद्वितीय आस्था का सम्मान करते हुए तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (TTD) ने उन्हें वीवीआईपी महाद्वारम से मंदिर में प्रवेश कराकर विशेष दर्शन का आयोजन किया।


पोते के साथ चढ़ाई का साहसिक सफर

नवनीतम्मा का साहस:
नवनीतम्मा, जो मूल रूप से चेन्नई की निवासी हैं, हाल ही में तिरुपति में अपने रिश्तेदारों के पास रह रही थीं। परिवार के सदस्य उन्हें इस लंबी यात्रा से रोकने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन उनका इरादा अडिग था। अपने पोते का हाथ थामकर उन्होंने 3,550 सीढ़ियों की चढ़ाई शुरू की और सफलतापूर्वक इस कठिन यात्रा को पूरा किया। उनके जज्बे को देखकर अन्य तीर्थयात्री भी हैरान रह गए और इस यात्रा का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।


सीएम ने नवनीतम्मा को बताया प्रेरणास्रोत

मुख्यमंत्री की सराहना:
जब आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री नारा चंद्रबाबू नायडू को नवनीतम्मा की यात्रा की जानकारी मिली, तो उन्होंने उनकी प्रशंसा की। उन्होंने लिखा कि सच्ची भक्ति में उम्र केवल एक संख्या है। नवनीतम्मा की यात्रा ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया और उनके परिवार के समर्थन को प्रेरणादायक बताया।


विशेष वीवीआईपी दर्शन का आयोजन

टीटीडी की पहल:
नवनीतम्मा की भक्ति को देखते हुए टीटीडी के चेयरमैन बी.आर. नायडू ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि उनके लिए विशेष वीआईपी दर्शन की व्यवस्था की जाए। उन्हें महाद्वारम से मंदिर के भीतर ले जाकर भगवान वेंकटेश्वर के दर्शन कराए गए। दर्शन के बाद, उन्हें रेशमी वस्त्र भेंट किए गए और भगवान का पवित्र प्रसाद दिया गया।


आभार का अनोखा तरीका

नवनीतम्मा का आभार:
रिश्तेदारों के अनुसार, नवनीतम्मा का जन्म 1910 में हुआ था। दर्शन के बाद, उनकी आंखों में संतोष और खुशी झलक रही थी। उन्होंने अपनी भावनाओं को शब्दों में नहीं कह पाईं, बल्कि मुस्कुराकर और हाथ जोड़कर आभार व्यक्त किया। उनका यह सफर लाखों भक्तों के लिए प्रेरणा बन चुका है।