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अधिकमास भानु सप्तमी व्रत: महत्व और पूजा विधि

7 जून को अधिकमास भानु सप्तमी का व्रत मनाया जाएगा, जो हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता है। इस दिन सूर्य देव की पूजा करने से भक्त के बिगड़े काम सुधर जाते हैं और जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। जानें इस व्रत का महत्व, पूजा विधि और इसके लाभ। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस दिन सूर्य देव की उपासना से भक्त को धन, दीर्घायु और स्वास्थ्य का आशीर्वाद मिलता है।
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अधिकमास भानु सप्तमी व्रत: महत्व और पूजा विधि

अधिकमास भानु सप्तमी का महत्व

7 जून को अधिकमास भानु सप्तमी का व्रत मनाया जाएगा, जो हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता है। इस व्रत के माध्यम से जीवन में सुख और शांति की प्राप्ति होती है। आइए, जानते हैं अधिकमास भानु सप्तमी के महत्व और पूजा विधि के बारे में। 


अधिकमास भानु सप्तमी के बारे में जानकारी

पंडितों के अनुसार, अधिकमास भानु सप्तमी सूर्य देव की कृपा प्राप्त करने के लिए एक महत्वपूर्ण व्रत है। इस दिन सूर्य की पूजा करने से भक्त के बिगड़े काम सुधर जाते हैं और जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। यह दिन उस समय का प्रतीक है जब भगवान सूर्य अपने रथ पर पृथ्वी पर आए थे। पौराणिक कथाओं के अनुसार, सूर्य देव एक पवित्र कमल पर स्वर्ण रथ पर सवार थे, जिसे सात घोड़े खींचते हैं, जो सूर्य की सात किरणों का प्रतीक हैं। इस दिन व्रत रखने वाले भक्तों को अच्छी सेहत और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। इस वर्ष, अधिकमास भानु सप्तमी 7 जून को है। 


आध्यात्मिक महत्व

पुराणों के अनुसार, इस दिन सूर्य देव की पूजा करने से भक्त को धन, दीर्घायु और स्वास्थ्य का आशीर्वाद मिलता है। भक्त सूर्य देव को प्रसन्न करने के लिए कई पवित्र स्तोत्रों का जाप करते हैं और महा-अभिषेक करते हैं।


व्रत के लाभ

पंडितों के अनुसार, इस व्रत के कई लाभ हैं। भानु सप्तमी की पूर्व संध्या पर गंगा में स्नान करने से भक्तों को आर्थिक समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ता। इस दिन पूजा करने वाली महिलाओं को अगले जन्म में अच्छे वर की प्राप्ति होती है। व्रत रखने से भक्त को स्वस्थ और सुखी जीवन का आशीर्वाद मिलता है।


पूजा विधि

इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें। तांबे के लोटे में जल भरकर उसमें लाल फूल, अक्षत और रोली डालें। उगते सूर्य को यह जल अर्पित करें और सूर्य मंत्रों का जाप करें। पूजा के दौरान लाल पुष्प, गुड़, गेहूं और लाल वस्त्र अर्पित करना शुभ माना जाता है।


दीपदान का महत्व

पंडितों के अनुसार, इस दिन दीपदान करना विशेष महत्व रखता है। पंचमी की शाम को घर के मंदिर में, तुलसी के पौधे के पास और पवित्र नदी या पीपल के पेड़ के नीचे घी का दीपक जलाना चाहिए।


दान का महत्व

भानु सप्तमी के दिन लाल वस्त्र, गुड़, गेहूं और तांबे के बर्तन का दान करना शुभ माना जाता है। इससे सूर्य देव प्रसन्न होते हैं और व्यक्ति को मान-सम्मान और आत्मविश्वास मिलता है।


व्रत के नियम

इस दिन व्रत करते समय नमक का सेवन नहीं करना चाहिए और व्रत से जुड़े नियमों का पालन करना आवश्यक है। इससे व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है।


पौराणिक कथा

भानु सप्तमी की कथा भगवान श्रीकृष्ण और उनके पुत्र साम्ब से जुड़ी है। साम्ब ने महर्षि दुर्वासा का अपमान किया, जिसके कारण उन्हें कुष्ठ रोग का श्राप मिला। भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें सूर्य देव की उपासना करने की सलाह दी। साम्ब ने कठोर तपस्या की और सूर्य देव की कृपा से उनके सभी पापों का निवारण हुआ।


गलतियों से बचें

इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करना और सूर्य देव को अर्घ्य देना शुभ माना जाता है। मांसाहार, शराब और अन्य तामसिक पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए।


शुभ कार्य

इस दिन सूर्य देव की कृपा प्राप्त करने के लिए पूजा-पाठ के साथ-साथ कुछ गलतियों से बचना भी आवश्यक है। श्रद्धा से सूर्य उपासना करने से जीवन में सुख और समृद्धि का संचार होता है।


अधिकमास भानु सप्तमी का महत्व

इस दिन सूर्य देव की पूजा करने से मान-सम्मान, यश और उच्च पद की प्राप्ति होती है। सूर्य दोष दूर होता है और भक्त को धन और धान्य की प्राप्ति होती है।