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आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2026: घटस्थापना की विधि और महत्व

आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2026 का पर्व शक्ति की उपासना के लिए महत्वपूर्ण है। यह नवरात्रि 15 जुलाई से शुरू होगी, जिसमें मां दुर्गा के दस महाविद्याओं की आराधना का विशेष महत्व है। जानें घटस्थापना की विधि और इस पर्व का महत्व, जिससे साधक को विशेष आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त होती है।
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आषाढ़ गुप्त नवरात्रि का महत्व


आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2026, नई दिल्ली: हिंदू धर्म में नवरात्रि का पर्व शक्ति की उपासना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। आमतौर पर लोग साल में आने वाली दो प्रमुख नवरात्रियों, चैत्र और शारदीय नवरात्रि के बारे में जानते हैं, लेकिन इसके अलावा साल में दो गुप्त नवरात्रि भी होती हैं। इनमें से एक आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि है, जो कल से आरंभ होने जा रही है। आइए जानते हैं इस साल आषाढ़ गुप्त नवरात्रि की सही तारीख, घटस्थापना का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि के बारे में।


आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2026 की तिथियाँ

पंचांग के अनुसार, आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 14 जुलाई 2026 को दोपहर 3 बजकर 12 मिनट पर शुरू होगी और 15 जुलाई 2026 को सुबह 11 बजकर 50 मिनट पर समाप्त होगी। हिंदू धर्म में अधिकांश व्रत और त्योहार उदया तिथि के आधार पर मनाए जाते हैं। इसलिए आषाढ़ गुप्त नवरात्रि का पहला दिन 15 जुलाई 2026, बुधवार से माना जाएगा। इस दिन श्रद्धालु कलश स्थापना कर नौ दिनों तक मां भगवती की पूजा करेंगे।


गुप्त नवरात्रि का महत्व

आषाढ़ गुप्त नवरात्रि का महत्व सामान्य नवरात्रियों से भिन्न है। जहां चैत्र और शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा होती है, वहीं गुप्त नवरात्रि में दस महाविद्याओं की साधना का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यता है कि इन नौ दिनों में मां काली, तारा, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, भैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला देवी की आराधना करने से साधक को विशेष आध्यात्मिक शक्ति और देवी कृपा प्राप्त होती है। सामान्य श्रद्धालु भी इन दिनों मां दुर्गा की पूजा, दुर्गा सप्तशती का पाठ, मंत्र जाप और व्रत करके सुख-समृद्धि की कामना कर सकते हैं।


घटस्थापना का महत्व

गुप्त नवरात्रि की शुरुआत घटस्थापना से होती है। कलश को भगवान विष्णु, ब्रह्मा और सभी देवी-देवताओं का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि विधि-विधान से स्थापित किया गया कलश पूरे नौ दिनों तक घर में सकारात्मक ऊर्जा, सुख और समृद्धि का संचार करता है। इसलिए घटस्थापना करते समय शुद्धता और सही विधि का पालन करना आवश्यक है।


घटस्थापना की विधि


  • 15 जुलाई की सुबह स्नान करके साफ वस्त्र पहनें।

  • पूजा स्थान की सफाई करें और वहां लाल या पीला कपड़ा बिछाएं।

  • मिट्टी की चौड़ी थाली में जौ बोएं।

  • जौ के बीच तांबे या मिट्टी का कलश स्थापित करें।

  • कलश में गंगाजल और साफ जल भरें।

  • सुपारी, अक्षत, लौंग, इलायची, सिक्का और दूर्वा डालें।

  • कलश के मुख पर आम के पांच पत्ते रखें और उसके ऊपर नारियल स्थापित करें।

  • नारियल पर मौली बांधना शुभ माना जाता है। इसके बाद मां दुर्गा का ध्यान करें, दीपक जलाएं और कलश की पूजा करें।

  • देवी को लाल फूल, रोली, अक्षत, चंदन, चुनरी और फल अर्पित करें।

  • आखिर में दुर्गा चालीसा, दुर्गा सप्तशती या देवी मंत्रों का पाठ करें और मां से परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें।