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कन्या पूजन में बटुक भैरव का महत्व: जानें क्यों है यह अनिवार्य

नवरात्रि के दौरान कन्या पूजन का महत्व अत्यधिक है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसमें बटुक भैरव का होना क्यों आवश्यक है? इस लेख में हम जानेंगे कि कैसे बटुक भैरव का शामिल होना पूजा को पूर्ण बनाता है और इसके पीछे का गहरा रहस्य क्या है। साथ ही, हम यह भी देखेंगे कि कैसे यह पूजा नकारात्मक ऊर्जाओं से सुरक्षा प्रदान करती है।
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कन्या पूजन और बटुक भैरव का रहस्य

नवरात्रि और बटुक भैरव: नवरात्रि के नौ दिवसीय पावन पर्व के समापन पर, महाअष्टमी या महानवमी के दिन कन्या पूजन को अत्यंत पवित्र माना जाता है। इस अवसर पर हम 9 छोटी कन्याओं को माता रानी का स्वरूप मानकर उनकी पूजा करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि कन्या पूजन तब तक पूर्ण नहीं होता जब तक उसमें कम से कम एक छोटा बालक शामिल न हो? इस बालक को बटुक भैरव या 'लांगुरिया' कहा जाता है। आइए जानते हैं कि इनके बिना कन्या पूजन अधूरा क्यों माना जाता है।


भैरव का स्वरूप
शास्त्रों के अनुसार, जब माता दुर्गा ने महिषासुर का वध करने के लिए अवतार लिया, तब भगवान शिव ने माता की रक्षा के लिए भैरव रूप धारण किया।


बटुक भैरव का महत्व
माता दुर्गा ने भैरव बाबा को यह वरदान दिया था कि— 'शक्तिपीठों की पूजा तब तक पूरी नहीं होगी, जब तक भक्त तुम्हारे दर्शन नहीं करेंगे।' इसी प्रकार, कन्या पूजन में 9 कन्याएं नवदुर्गा का प्रतीक होती हैं, और उनके साथ बैठा बालक बटुक भैरव (भगवान शिव का बाल रूप) का प्रतिनिधित्व करता है। इनके बिना यह पूजा अधूरी रह जाती है।


रक्षा और सम्मान का संदेश
सनातन धर्म में देवियों के साथ हमेशा उनके रक्षक के रूप में भैरव देव उपस्थित रहते हैं। कन्या पूजन में बालक को शामिल करना इस बात का प्रतीक है कि समाज में नारी शक्ति (देवियां) पूजनीय हैं, और पुरुषों का कर्तव्य उनकी रक्षा करना है।


'लांगुरिया'
संत तुलसीदास जी ने हनुमान जी को लांगुरिया के रूप में माता सीता का परम भक्त बताया है। इसलिए कई स्थानों पर इस बालक को हनुमान जी का रूप मानकर 'लांगुरिया' भी कहा जाता है।


कन्या पूजन की विधि
कन्या पूजन में 2 से 10 वर्ष की 9 कन्याओं को बुलाना चाहिए, और उनके साथ एक या दो बालकों को बटुक भैरव के रूप में शामिल करना चाहिए। सबसे पहले कन्याओं और बालक के पैर धोकर, उन्हें कुमकुम का तिलक लगाना चाहिए, कलावा बांधना चाहिए और प्रेमपूर्वक हलवा, पूरी और काले चने का भोग खिलाना चाहिए। अंत में उन्हें उपहार और दक्षिणा देकर उनका आशीर्वाद लेना चाहिए।


नकारात्मक ऊर्जाओं से सुरक्षा
भैरव बाबा की उपस्थिति से घर के सभी कष्ट दूर होते हैं और माता रानी प्रसन्न होती हैं। इनकी साधना से बुरी नजर, तंत्र-बाधा, भूत-प्रेत और सभी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जाओं का नाश होता है।