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कामिका एकादशी 2026: जानें तिथि और शुभ मुहूर्त

कामिका एकादशी 2026 का व्रत हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता है। इस दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है। जानें इस वर्ष कामिका एकादशी कब मनाई जाएगी, इसके शुभ मुहूर्त और व्रत के दौरान ध्यान रखने योग्य बातें। साथ ही, जानें कि इस दिन की तैयारी कैसे करें ताकि व्रत का पूर्ण फल प्राप्त हो सके।
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कामिका एकादशी का महत्व


कामिका एकादशी के दिन व्रत करने से साधक को शुभ फल मिलता है


कामिका एकादशी, जो हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखती है, इस दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, सावन माह के कृष्ण पक्ष में आने वाली इस एकादशी पर व्रत करने से साधक को शुभ फल और पापों से मुक्ति मिलती है। आइए जानते हैं कि इस वर्ष कामिका एकादशी कब मनाई जाएगी और इसके शुभ मुहूर्त क्या हैं।


कामिका एकादशी 2026 की तिथि और शुभ मुहूर्त

वैदिक पंचांग के अनुसार, कामिका एकादशी सावन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाती है। इस वर्ष, यह तिथि 08 अगस्त को रात 03:29 बजे से शुरू होगी और 09 अगस्त को रात 12:34 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के अनुसार, 08 अगस्त को कामिका एकादशी का व्रत किया जाएगा। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग का महासंयोग सुबह 06:04 से 06:21 बजे तक रहेगा।


कामिका एकादशी व्रत का पारण समय

एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि पर किया जाता है। कामिका एकादशी का पारण 09 अगस्त को सुबह 06:05 से 08:39 बजे तक किया जाएगा। इस दिन मंदिरों या गरीबों को अन्न-धन का दान करना चाहिए, जिससे साधक को व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है।


महत्वपूर्ण मुहूर्त


  • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:36 से 05:20 बजे तक

  • अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:05 से 12:57 बजे तक

  • विजय मुहूर्त: दोपहर 02:40 से 03:31 बजे तक

  • गोधूलि मुहूर्त: शाम 07:58 से 08:06 बजे तक

  • अमृत काल: रात 08:12 से 09:39 बजे तक


व्रत के दौरान ध्यान रखने योग्य बातें


  • एकादशी के दिन केवल सात्विक भोजन का सेवन करें।

  • दशमी तिथि की रात से पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन करें।

  • सुबह स्नान के बाद भगवान विष्णु के सामने व्रत का संकल्प लें।

  • पूजा में तुलसी के पत्ते अवश्य शामिल करें।

  • व्रत के दिन क्रोध, झूठ बोलने और निंदा से दूर रहें।


कामिका एकादशी से पहले की तैयारी


  • पूजा कक्ष की सफाई: कामिका एकादशी से पहले पूजा कक्ष की सफाई करें।

  • घर को व्यवस्थित करें: पूजा कक्ष, किचन और मुख्य द्वार की सफाई करें।

  • टूटी-फूटी चीजें हटाएं: घर में कोई भी टूटी वस्तु न रखें।

  • मुख्य द्वार की सफाई: मुख्य द्वार को साफ रखें।

  • तुलसी का पौधा लगाएं: तुलसी की देखभाल करें।