चातुर्मास 2026: देवशयनी एकादशी से शुरू होने वाली महत्वपूर्ण परंपरा
चातुर्मास की परंपरा
भगवान विष्णु की चार महीने की योग निद्रा की परंपरा को 'चातुर्मास' कहा जाता है। यह आषाढ़ मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी (देवशयनी एकादशी) से शुरू होती है और कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी (देवउठनी एकादशी) पर समाप्त होती है। इस लेख में हम इस परंपरा के बारे में विस्तार से जानेंगे।
चातुर्मास 2026 की तिथियाँ
चातुर्मास की शुरुआत की तिथि – देवशयनी एकादशी – 25 जुलाई, 2026
चातुर्मास की समाप्ति की तिथि – देवउठनी एकादशी – 20 नवंबर, 2026
भगवान विष्णु की योग निद्रा का कारण
इस चार महीने की योग निद्रा से जुड़ी एक पौराणिक कथा है जिसमें दैत्यराज बलि, जो प्रहलाद के पौत्र थे, अत्यंत शक्तिशाली और दानवीर राजा माने जाते थे। उन्होंने अपने तप और पराक्रम से तीनों लोकों पर अधिकार कर लिया था। इस स्थिति से चिंतित होकर देवताओं ने भगवान विष्णु की शरण ली।
वामन अवतार और बलि का दान
भगवान विष्णु ने देवताओं की रक्षा के लिए वामन (बौने ब्राह्मण) का अवतार लिया। राजा बलि एक यज्ञ करवा रहे थे, और वामन देव ने दान में तीन पग भूमि मांगी। बलि ने दान का संकल्प लिया, और वामन ने अपना आकार विशाल कर लिया।
पहला पग: पूरी पृथ्वी और नीचे के लोकों को नाप लिया।
दूसरा पग: पूरे स्वर्ग लोक और आकाश को नाप लिया।
अब तीसरे पग के लिए कोई स्थान नहीं बचा। बलि ने अपना सिर वामन देव के आगे झुका दिया और कहा, "हे प्रभु! तीसरा पग आप मेरे सिर पर रख दीजिए।"
बलि को वरदान
भगवान विष्णु बलि की भक्ति और दानवीरता से प्रसन्न हुए और उन्होंने अपना तीसरा कदम बलि के सिर पर रखा, जिससे बलि पाताल लोक चले गए। बलि ने भगवान विष्णु से वरदान मांगा कि वे हमेशा उसके साथ पाताल लोक में निवास करें। भगवान ने यह वरदान स्वीकार कर लिया।
भगवान विष्णु की व्यवस्था
जब भगवान विष्णु पाताल लोक चले गए, तो माता लक्ष्मी ने एक गरीब स्त्री का रूप धारण कर बलि को राखी बांधी। बलि ने उन्हें अपनी बहन मान लिया और उपहार मांगने को कहा। माता लक्ष्मी ने बलि से भगवान विष्णु को वापस वैकुंठ लौटने का वचन मांगा। बलि ने उनकी बात मान ली, लेकिन दुखी हो गए। इसलिए भगवान विष्णु ने यह व्यवस्था बनाई कि वे हर साल आषाढ़ एकादशी से कार्तिक एकादशी तक के चार महीने पाताल लोक में योग निद्रा में बिताएंगे।
भगवान शिव का सृष्टि संचालन
जब भगवान विष्णु योग निद्रा में होते हैं, तब सृष्टि के संचालन का कार्य भगवान शिव संभालते हैं। इसलिए चातुर्मास के पहले महीने (सावन) में भगवान शिव की विशेष पूजा की जाती है।
देवशयनी एकादशी का महत्व
देवशयनी एकादशी से लेकर कार्तिक शुक्ल एकादशी तक भगवान विष्णु आराम करते हैं। इस दौरान किसी भी प्रकार के मांगलिक कार्य जैसे विवाह, गृह प्रवेश आदि की मनाही होती है। हालांकि, पूजा और अनुष्ठान किए जा सकते हैं।
इन कार्यों से बचें
इन चार महीनों में शादी-विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं, क्योंकि भगवान विष्णु योग निद्रा में होते हैं।
