जगन्नाथ रथ यात्रा से पहले डॉक्टरों ने किया भगवान का स्वास्थ्य परीक्षण, जानें क्यों है यह परंपरा?
जगन्नाथ रथ यात्रा का अनोखा पहलू
नई दिल्ली: जगन्नाथ पुरी की रथ यात्रा से पहले उत्तर प्रदेश के जौनपुर से एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहा है। इस वीडियो में एक चिकित्सकों की टीम भगवान जगन्नाथ की मूर्ति का स्टेथोस्कोप और अन्य चिकित्सा उपकरणों से स्वास्थ्य परीक्षण करती नजर आ रही है।
परंपरा का महत्व
यह दृश्य पहली बार में अजीब लग सकता है, लेकिन इसके पीछे एक गहरी धार्मिक परंपरा और आस्था है। बताया गया है कि यह रस्म हर साल रथ यात्रा से पहले जौनपुर के प्रसिद्ध रासमंडल मंदिर में आयोजित की जाती है।
भगवान के स्वास्थ्य परीक्षण की रस्म
क्या है भगवान के मेडिकल टेस्ट की परंपरा?
रासमंडल मंदिर में रथ यात्रा से पहले भगवान जगन्नाथ के स्वास्थ्य की प्रतीकात्मक जांच की जाती है। इस दौरान डॉक्टर श्रद्धा के साथ भगवान की मूर्ति का स्टेथोस्कोप से परीक्षण करते हैं और इसके बाद विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। इस वर्ष भी यह परंपरा निभाई गई, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
शत प्रतिशत नंबर लाकर मैरिट में प्रथम स्थान लाने वाले मनुवादी डॉक्टरों ने प्रभु जगन्नाथ का चेकअप कर लिया है, वह पूर्णतः स्वस्थ हो चुके हैं 🔥🔥
— Ravi Parmar (@raviparmarIN) July 15, 2026
मैरिट और योग्यता का डंका पूरी दुनिया में बज रहा है, टकला डॉक्टर थोड़ा परेशान दिख रहा है, कह रहा है थोड़ा सा बुखार है घबराने की कोई बात… pic.twitter.com/pVYR40o9vY
स्नान पूर्णिमा और भगवान की बीमारी
स्नान पूर्णिमा के बाद क्यों बीमार पड़ते हैं भगवान?
धार्मिक मान्यता के अनुसार, ज्येष्ठ माह की स्नान पूर्णिमा पर भगवान जगन्नाथ को 108 कलशों के पवित्र जल से स्नान कराया जाता है। कहा जाता है कि लंबे स्नान के कारण भगवान को ज्वर हो जाता है, इसलिए उन्हें कुछ दिनों तक विश्राम दिया जाता है और भक्तों को उनके दर्शन नहीं होते।
अनासर काल की व्याख्या
क्या होता है अनासर काल?
स्नान पूर्णिमा के अगले दिन से आषाढ़ कृष्ण पक्ष की अमावस्या तक का समय 'अनासर काल' कहलाता है। इस दौरान भगवान जगन्नाथ स्वास्थ्य लाभ करते हैं, इसलिए मंदिर के कपाट कुछ समय के लिए बंद रहते हैं। इस अवधि में श्रद्धालु भगवान के दर्शन नहीं कर पाते।
इलाज के दौरान अर्पित सामग्री
इलाज के दौरान क्या अर्पित किया जाता है?
अनासर काल में भगवान को आयुर्वेदिक काढ़ा, जड़ी-बूटियां और हल्का भोजन अर्पित किया जाता है। इसे भगवान के उपचार का प्रतीक माना जाता है। रथ यात्रा से पहले किया जाने वाला मेडिकल टेस्ट भी इसी धार्मिक परंपरा का हिस्सा है, जो भगवान के स्वस्थ होने का प्रतीक माना जाता है।
सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं
सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रिया
वायरल वीडियो के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की विभिन्न प्रतिक्रियाएं आई हैं। कुछ लोग इस अनोखी परंपरा को देखकर हैरान हैं, जबकि कई इसे भारतीय संस्कृति और आस्था का अद्भुत उदाहरण मानते हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, यह रस्म कई वर्षों से निभाई जा रही है और इसे भगवान के स्वस्थ होने के साथ रथ यात्रा के शुभारंभ का प्रतीक माना जाता है।
