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दुल्हन का दूल्हे के बाईं ओर बैठने का महत्व: जानें इसके पीछे की वजहें

हिंदू विवाह में दुल्हन का दूल्हे के बाईं ओर बैठना एक महत्वपूर्ण परंपरा है। यह न केवल धार्मिक मान्यताओं से जुड़ा है, बल्कि इसके पीछे कई सांस्कृतिक और आध्यात्मिक कारण भी हैं। जानें इस परंपरा का महत्व और इसके पीछे की गहरी सोच।
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शादी के रीति-रिवाजों में बाईं ओर बैठने की परंपरा

हिंदू विवाह में कई प्रकार के रीति-रिवाज होते हैं, जो विधिपूर्वक संपन्न होते हैं। हल्दी, मेहंदी से लेकर फेरे लेने तक की रस्में होती हैं, जो आमतौर पर 4-5 दिनों तक चलती हैं। इनमें से एक महत्वपूर्ण रस्म है दुल्हन का दूल्हे के बाईं ओर बैठना। विवाह के समय दुल्हन को दूल्हे के दाईं ओर बिठाया जाता है, लेकिन उसके बाद वह हमेशा उसके बाईं ओर रहती है।


शास्त्रों के अनुसार, शादी और अन्य शुभ कार्यों में पत्नी को अपने पति की बाईं ओर बैठना आवश्यक होता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि पत्नी का स्थान पति के बाईं ओर क्यों होता है? आइए, इस रिपोर्ट में हम इसके महत्व और कारणों को समझते हैं।


प्राचीन मान्यताओं का महत्व

हिंदू धर्म की प्राचीन मान्यताओं के अनुसार, पत्नी को बाईं ओर दर्शाया जाता है। पत्नियों को 'वामांगी' कहा जाता है, जिसका अर्थ है बायां हिस्सा। प्राचीन चित्रों में पत्नियों को हमेशा पुरुषों की बाईं ओर बैठा हुआ दिखाया गया है।


महादेव से जुड़ाव

भगवान शिव ने अपने बाएं आधे हिस्से को मां शक्ति को समर्पित किया था। अर्धनारीश्वर का स्वरूप भी इसी सिद्धांत पर आधारित है। पत्नी को अर्धांगिनी माना जाता है, जो गृहस्थ का बायां हिस्सा होती है।


दिल से जुड़ा रिश्ता

धार्मिक अनुष्ठानों में सभी रस्में महिलाओं द्वारा शुरू की जाती हैं। जब पति-पत्नी का परिचय दिया जाता है, तो पुरुष के नाम से पहले महिला का नाम लिया जाता है। दिल शरीर के बाईं ओर होता है, और पत्नी अपने पति का दिल होती है।


विशेष अवसरों पर दाईं ओर बैठने की परंपरा

बेटी की शादी, यज्ञ, और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों के समय पत्नी को पति के दाईं ओर बैठना चाहिए। इसी तरह, बच्चे के जन्म और नामकरण संस्कार के समय भी पत्नी को दाईं ओर रहना चाहिए।


वैदिक परंपरा का संबंध

वैदिक परंपरा में पुरुष को पुरुष और स्त्री को प्रकृति माना जाता है। सभी वैदिक अनुष्ठानों का उद्देश्य पुरुष को आत्मा या परमात्मा तक पहुंचाना है। इसलिए पत्नी (प्रकृति) को पति (पुरुष) के दाईं ओर खड़ा होना चाहिए।