देवशयनी एकादशी: भाग्य के लिए दान का महत्व
सोने की तरह चमक उठेगा भाग्य
हर वर्ष आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवशयनी एकादशी का व्रत मनाया जाता है। द्रिक पंचांग के अनुसार, इस साल यह व्रत 25 जुलाई को होगा। देवशयनी एकादशी का विशेष महत्व है, क्योंकि इस दिन भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं, जिससे चार महीने का चातुर्मास आरंभ होता है।
भगवान विष्णु के योगनिद्रा में चले जाएंगे
इस चातुर्मास का समापन 20 नवंबर को कार्तिक माह की देवउठनी एकादशी पर होगा, जब भगवान फिर से जागेंगे और संसार का कार्यभार संभालेंगे। भगवान विष्णु के योगनिद्रा में जाने से देवशयनी एकादशी का व्रत और पूजा का महत्व कम नहीं होता।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन व्रत और पूजा करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। देवशयनी एकादशी के अवसर पर दान-पुण्य का भी विशेष महत्व है। इस दिन दान करने से भाग्य में वृद्धि होती है। आइए जानते हैं इस दिन किन चीजों का दान करना चाहिए।
देवशयनी एकादशी पर करें इन चीजों का दान
- अनाज: इस दिन गेहूं, चावल, दालें आदि का दान करें। अन्नदान को शास्त्रों में महादान माना गया है।
- जल: प्याऊ लगवाएं या राहगीरों को ठंडा पानी पिलाएं। प्यासे को पानी पिलाना बहुत पुण्य का कार्य है।
- मौसमी फल और वस्त्र: मौसमी फल जैसे आम, तरबूज आदि का दान करें। साथ ही पीले और नए वस्त्र का दान करें।
- पीले रंग की वस्तुएं और जूते-चप्पल: पीला चंदन, पीला केसर, पीले फूल और जरूरतमंदों को जूते-चप्पल का दान करें।
- गायों की सेवा और अन्य चीजें: गायों की सेवा करें और धार्मिक पुस्तकों, तुलसी, और मिट्टी के बर्तन का दान करें।
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