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नवरात्रि 2026: मां कात्यायनी की पूजा विधि और विशेष मंत्र

नवरात्रि 2026 के छठे दिन भक्तजन मां कात्यायनी की पूजा कर रहे हैं। जानें इस दिन की विशेष पूजा विधि, चालीसा, आरती और मंत्र। मां कात्यायनी को शक्ति और साहस का प्रतीक माना जाता है। इस लेख में मां की आराधना के तरीके और उनके महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई है।
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नवरात्रि का छठा दिन: मां कात्यायनी की आराधना


नवरात्रि 2026 का छठा दिन: भक्तजन इस समय मां की भक्ति में लीन हैं। शारदीय नवरात्रि के दौरान हर दिन मां के विभिन्न रूपों की पूजा की जाती है। आज के दिन मां दुर्गा के छठे स्वरूप, मां कात्यायनी की पूजा का महत्व है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, मां कात्यायनी अपने भक्तों के दुख, भय और संकट को दूर करती हैं। नवरात्रि में व्रत रखने वाले श्रद्धालु विधिपूर्वक मां की पूजा करते हैं और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। यहां मां कात्यायनी की चालीसा, आरती और विशेष मंत्र पढ़ें।


मां कात्यायनी को शक्ति और साहस का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि महर्षि कात्यायन की तपस्या से प्रसन्न होकर देवी ने उनके घर पुत्री के रूप में जन्म लिया, जिससे उनका नाम कात्यायनी पड़ा। मां कात्यायनी की चार भुजाएं हैं, जिनमें दाहिने हाथ में अभय मुद्रा और वर मुद्रा है, जबकि बाएं हाथों में तलवार और कमल का फूल है। उनका वाहन सिंह है।


नवरात्रि 2026: मां कात्यायनी की पूजा विधि और विशेष मंत्र


मां कात्यायनी की पूजा विधि

नवरात्रि के छठे दिन, सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें। पूजा स्थल पर मां दुर्गा और मां कात्यायनी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। दीपक जलाकर फूल, अक्षत, धूप और नैवेद्य अर्पित करें। इसके बाद मां के मंत्रों का जाप करें और चालीसा तथा आरती का पाठ करें। पूजा के अंत में परिवार की सुख-शांति और खुशहाली की प्रार्थना करें।


मां कात्यायनी चालीसा


॥ दोहा ॥


जय कात्यायनी मां, जय महिषासुर मारिणी।
सुर नर मुनि आराधित, जय मंगल करिणी॥


॥ चौपाई ॥


जय जय अंबे जय कात्यायनी।
जय महिषासुर घातिनी दानी॥


ब्रह्मा, विष्णु, शिव जी ध्यावैं।
शक्ति शक्ति सब जगत बनावैं॥


रक्तदंतिका और अन्नपूर्णा।
मां कात्यायनी हैं सम्पूर्णा॥


कात्यायन ऋषि मुनि के आश्रय।
कात्यायनी मां सबके बासय॥


भय, संकट हरिणी तुही माता।
भक्तों के दुःख हरती आपा॥


जो कोई तेरी शरण में आवे।
मनवांछित फल वह नर पावे॥


ध्यान धार जो कोई नारी।
कात्यायनी पूर्ण सुखकारी॥


कुमारी पूजा जो नित ध्यावें।
अविवाहित जीवन न बितावे॥


कलियुग में मां तू सहाय।
जो भी भक्त करे मन लाय॥


कात्यायनी मां तेरी महिमा।
सतयुग, त्रेता हो या द्वापर॥


सिंह सवारी मां भवानी।
जय-जय-जय अंबे भवानी॥


मां कात्यायनी की आरती और मंत्र

मां कात्यायनी की आरती


जय जय अम्बे जय कात्यायनी।
जय जग माता जग की महारानी॥


बैजनाथ स्थान तुम्हारा।
वहावर दाती नाम पुकारा॥


कई नाम हैं, कई धाम हैं।
यह स्थान भी तो सुखधाम है॥


हर मंदिर में ज्योत तुम्हारी।
कहीं योगेश्वरी महिमा न्यारी॥


हर जगह उत्सव होते रहते।
हर मंदिर में भक्त हैं कहते॥


कात्यायनी रक्षक काया की।
ग्रंथि काटे मोह माया की॥


झूठे मोह से छुड़ाने वाली।
अपना नाम जपाने वाली॥


बृहस्पतिवार को पूजा करिए।
ध्यान कात्यायनी का धरिए॥


हर संकट को दूर करेगी।
भंडारे भरपूर करेगी॥


जो भी मां को भक्त पुकारे।
कात्यायनी सब कष्ट निवारे॥


मां कात्यायनी का मंत्र


नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की आराधना के दौरान इस मंत्र का जाप किया जाता है.


मंत्र:


कात्यायनी महामाये, महायोगिन्यधीश्वरी।
नन्दगोपसुतं देवी, पति मे कुरु ते नमः॥


मां कात्यायनी का स्तुति मंत्र


या देवी सर्वभूतेषु मां कात्यायनी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥