नाग पंचमी पर कालसर्प दोष निवारण के प्रभावी उपाय
राहु-केतु के प्रभावों को कम करने का अवसर
राहु-केतु की पीड़ा का समाधान और तरक्की के द्वार खोलना
Kaal Sarp Dosh, नई दिल्ली: हिंदू धर्म में नाग पंचमी का पर्व अत्यंत पवित्र माना जाता है। इस दिन नाग देवता की पूजा का विशेष महत्व है। यह त्योहार हर साल सावन महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। इस वर्ष नाग पंचमी 17 अगस्त को मनाई जाएगी। इस दिन नाग देवता की पूजा से कालसर्प दोष का निवारण होता है और सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है।
ज्योतिष के अनुसार, कालसर्प दोष जीवन में रुकावटें, मानसिक तनाव और आर्थिक उतार-चढ़ाव का मुख्य कारण होता है। जब कुंडली में सभी ग्रह राहु और केतु के बीच होते हैं, तब कालसर्प योग बनता है। नाग पंचमी का दिन नाग देवताओं और राहु-केतु के प्रभावों को शांत करने का सबसे शक्तिशाली अवसर माना जाता है। आइए, कालसर्प दोष के निवारण के उपायों पर चर्चा करते हैं।
कालसर्प दोष निवारण के प्रभावी उपाय
- चांदी के नाग-नागिन का जलप्रवाह: नाग पंचमी के दिन किसी पंडित से चांदी या तांबे के नाग-नागिन का जोड़ा बनवाएं। पूजा के समय इन पर कच्चे दूध और जल से अभिषेक करें। इसके बाद अपनी मनोकामना बोलते हुए इन्हें बहते जल में प्रवाहित करें। यह उपाय राहु-केतु की पीड़ा को कम करता है।
- शिवलिंग पर विशेष जलाभिषेक: नाग पंचमी के दिन शिव मंदिर जाकर तांबे के लोटे में जल, कच्चा दूध, काले तिल और गंगाजल मिलाएं। शिवलिंग पर इस जल से धारा प्रवाह करते हुए ॐ नम: शिवाय या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें। शिव जी को नाग प्रिय हैं, इसलिए उनकी पूजा से कालसर्प दोष का प्रभाव समाप्त होता है।
- रुद्राक्ष और मयूर पंख का प्रयोग: यदि दोष के कारण संतान या स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हैं, तो इस दिन 8 मुखी रुद्राक्ष धारण करना लाभकारी होता है। इसके अलावा, अपने घर के मुख्य द्वार और पूजा घर में मोर पंख लगाएं, क्योंकि मोर नागों का भक्षक है और यह राहु के प्रभाव को कम करता है।
- नाग स्तोत्र का पाठ व दान: नाग पंचमी के दिन श्री नवनाग स्तोत्र का 11 बार पाठ करें। पूजा के बाद जरूरतमंदों को काले उड़द, तिल, नीले वस्त्र और सामर्थ्य अनुसार दक्षिणा का दान करें। इससे अटके हुए काम बनने लगते हैं।
