नाग पंचमी: सांपों की पूजा और सनातन संस्कृति का महत्व
नाग पंचमी का महत्व
नाग पंचमी विशेष: शिव को आदि देव माना जाता है, जबकि शेष नाग जीवों के संरक्षक हैं। वासुकी जीवन के संघर्ष का प्रतीक है और तक्षक कलियुग में चिंतन का आधार है। यह सब परमब्रह्म नारायण के मार्गदर्शन में होता है। यह स्पष्ट है कि विश्व का कल्याण, प्राणियों में सद्भावना और सभी का सुख ही सनातन जीवन संस्कृति का मूल है। सामान्य जन इन आध्यात्मिक तत्वों को नहीं समझ पाते, इसलिए इन्हें पर्वों और त्योहारों के रूप में मनाया जाता है।
हालांकि, पिछले एक हजार वर्षों में धरती पर कई परिवर्तन आए हैं। कबीलों से विकसित सभ्यताओं ने कई बदलाव किए हैं, जिससे सनातन लोक के वैज्ञानिक पहलू कमजोर पड़ गए हैं।
आज नाग पंचमी का पर्व अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसे सांपों का त्योहार कहकर इसकी महत्ता को कम किया गया है। लेकिन अब जब दुनिया सनातन की शक्ति को समझने में जुटी है, तो हमें इसे उजागर करना चाहिए।
नाग पंचमी की पूजा विधि
नाग पंचमी, हिन्दू पंचांग के अनुसार, सावन माह की शुक्ल पक्ष की पंचमी को मनाई जाती है। इस दिन नाग देवता की पूजा की जाती है और उन्हें दूध से स्नान कराया जाता है। हालांकि, कई स्थानों पर दूध पिलाने की परंपरा भी है, जो शास्त्रों के अनुसार सही नहीं है।
इस दिन कई गांवों में कुश्ती का आयोजन होता है और गाय, बैल आदि पशुओं को नहलाया जाता है। अष्टनागों की पूजा भी की जाती है।
वासुकी, तक्षक, कालिया, मणिभद्रक, ऐरावत, धृतराष्ट्र, कार्कोटक और धनंजय जैसे नाग प्राणियों को अभय प्रदान करते हैं।
नाग यज्ञ और नाग कन्याएं
जनमेजय का नाग यज्ञ: भविष्य पुराण में जनमेजय के नाग यज्ञ का उल्लेख है, जिसमें नागवंशी नागों ने आस्तिक मुनि से कहा कि जो लोग सावन में नागों की पूजा करेंगे, उनके घर में नाग दंश का भय नहीं रहेगा।
शिव की नाग कन्याएं: भगवान शिव और देवी पार्वती की पांच कन्याएं नाग रूप में जन्मी थीं। इनकी पूजा से परिवार में सर्पदंश का भय नहीं रहता।
नाग पंचमी की पूजा विधि
नाग पंचमी के दिन प्रातः उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र पहनें। पूजा के लिए ताजा भोजन तैयार करें। दीवार पर गेरू से पूजा स्थान बनाएं और नाग देवताओं की आकृतियां बनाएं।
नागों की पूजा में दूध, दूर्वा, पुष्प, जल आदि का उपयोग करें। आरती के बाद कथा सुनें। इस दिन धरती खोदना निषिद्ध है।
