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निर्जला एकादशी: जानें पूजा का शुभ मुहूर्त और विधि

निर्जला एकादशी, जो 25 जून को मनाई जाएगी, साल की सबसे महत्वपूर्ण एकादशी मानी जाती है। इस दिन भक्त भगवान विष्णु की पूजा करते हैं और जल का सेवन नहीं करते। इस वर्ष, चार शुभ योग बन रहे हैं, जो इस व्रत के महत्व को बढ़ाते हैं। जानें इस दिन की पूजा विधि और शुभ मुहूर्त के बारे में विस्तार से।
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निर्जला एकादशी: जानें पूजा का शुभ मुहूर्त और विधि

निर्जला एकादशी का व्रत 25 जून को


निर्जला एकादशी का महत्व
निर्जला एकादशी को साल की सबसे महत्वपूर्ण एकादशी माना जाता है। यह हर वर्ष ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाती है। इस दिन भक्त भगवान विष्णु की पूजा करते हैं और जल का भी सेवन नहीं करते। पौराणिक कथाओं के अनुसार, पांडु पुत्र भीम ने इस दिन का व्रत रखा था।


धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस व्रत को रखने से सभी एकादशी व्रतों का पुण्य फल प्राप्त होता है और भगवान विष्णु की कृपा भी मिलती है। इस वर्ष, निर्जला एकादशी का व्रत 25 जून को होगा। इस दिन चार शुभ योग बन रहे हैं, जो इस व्रत के महत्व को और बढ़ा देते हैं।


निर्जला एकादशी पर चार शुभ योग

पंचांग के अनुसार, इस साल निर्जला एकादशी पर शिव योग, रवि योग और सिद्ध योग का निर्माण हो रहा है। रवि योग सुबह 05:25 बजे से शुरू होकर शाम 04:29 बजे तक रहेगा। वहीं, शिव योग सुबह 10:54 बजे बनेगा।


सिद्ध योग भी इस दिन बन रहा है, जो 26 जून को सुबह 11:36 बजे तक रहेगा। इस दिन गुरुवार भी है, जो भगवान विष्णु को समर्पित है। यह संयोग व्रत के लिए अत्यंत शुभ है।


निर्जला एकादशी का शुभ मुहूर्त


  • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:46 से 05:17 बजे तक।

  • प्रात: संध्या मुहूर्त: सुबह 05:01 से 05:48 बजे तक।

  • अभिजित मुहूर्त: दोपहर 01:21 से 02:26 बजे तक।

  • विजय मुहूर्त: शाम 04:35 से 05:40 बजे तक।


निर्जला एकादशी पूजा विधि

निर्जला एकादशी के दिन, सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर व्रत का संकल्प लें। फिर, साफ वस्त्र पहनकर एक चौकी पर पीले रंग का वस्त्र बिछाएं और उस पर विष्णु और लक्ष्मी जी की प्रतिमा रखें। दोनों की पूजा करें। भगवान को धूप, दीप, फल और पीले रंग की मिठाई का भोग लगाएं। खीर में तुलसी डालकर भी भोग लगा सकते हैं। अंत में, विष्णु जी के मंत्रों का जाप करें और मां लक्ष्मी तथा विष्णु जी की आरती करें।