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भाद्रपद पूर्णिमा 2026: महत्व और धार्मिक मान्यताएँ

भाद्रपद पूर्णिमा 2026 एक महत्वपूर्ण धार्मिक तिथि है, जो चंद्रमा की पूर्णता के साथ जुड़ी है। इस दिन का पौराणिक महत्व और अनुष्ठान, जैसे श्राद्ध और तर्पण, इसे विशेष बनाते हैं। जानें इस दिन के पीछे की मान्यताएँ और कैसे यह मानव मन और चेतना पर प्रभाव डालता है।
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भाद्रपद पूर्णिमा की तिथि

भाद्रपद पूर्णिमा 2026 की तिथि: भाद्रपद पूर्णिमा हिंदू धर्म में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और पवित्र दिन है। इस दिन चंद्रमा अपनी सम्पूर्णता और तेज के साथ होता है, जो मन, चेतना और ब्रह्मांडीय ऊर्जा के पूर्णता से जुड़ा है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन पृथ्वी और परमधाम के बीच की दूरी न्यूनतम हो जाती है, जिससे इस दिन किए गए जप, तप और दान सीधे ईश्वर तक पहुँचते हैं। यह तिथि अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक है। गौतम बुद्ध को भी इसी दिन ज्ञान की प्राप्ति हुई थी।


भाद्रपद पूर्णिमा का पौराणिक महत्व

पौराणिक महत्व: भाद्रपद पूर्णिमा के दिन उन पूर्वजों का श्राद्ध या तर्पण किया जाता है जिनका निधन किसी भी महीने की पूर्णिमा तिथि को हुआ हो। इसके अगले दिन (27 सितंबर) से आश्विन प्रतिपदा तिथि के साथ नियमित पितृ पक्ष श्राद्ध की शुरुआत होती है।


मन और चेतना का प्रभाव

चंद्रमा का प्रभाव: चंद्रमा मन का कारक माना जाता है। पूर्णिमा के दिन ज्वार-भाटे की तरह मानव शरीर (जिसमें जल तत्व प्रमुख है) और मानसिक तरंगों पर गहरा असर होता है। सही साधना से ऊर्जा ऊर्ध्वगामी होती है।

इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने के बाद भूखे या जरूरतमंद लोगों को भोजन, अनाज और वस्त्रदान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।