भारत में पिंडदान के लिए प्रमुख स्थान: पितृ पक्ष के दौरान श्रद्धांजलि अर्पित करें
पितृ पक्ष की शुरुआत
भाद्रपद की पूर्णिमा से पितृ पक्ष की अवधि शुरू हो गई है, जो अमावस्या के दिन समाप्त होती है। इस दौरान, पूर्वजों को तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान करने की परंपरा निभाई जाती है। यदि आप भी अपने पितरों की आत्मा की शांति और मोक्ष के लिए पिंडदान करने का विचार कर रहे हैं, तो यह जानकारी आपके लिए उपयोगी होगी।
पिंडदान के लिए प्रसिद्ध स्थल
गया जाने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि भारत में कई अन्य प्रसिद्ध स्थान हैं, जहां आप श्राद्ध और पिंडदान कर सकते हैं। आइए, जानते हैं इन स्थानों के बारे में।
कुरुक्षेत्र, हरियाणा
कुरुक्षेत्र को महाभारत से जोड़ा जाता है, और यहां ब्रह्म सरोवर, सन्निहित सरोवर और 48 कोस कुरुक्षेत्र में पिंडदान का विशेष महत्व है।
कैसे पहुंचें?
कुरुक्षेत्र जंक्शन पर पहुंचकर, ब्रह्म सरोवर और अन्य स्थलों तक पहुंचने के लिए बस, ऑटो-रिक्शा या कार का उपयोग कर सकते हैं। यह दूरी केवल 3-4 किलोमीटर है।
काशी, उत्तर प्रदेश
काशी, जिसे मोक्ष का द्वार माना जाता है, यहां पितरों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान किया जाता है। पिशाच मोचन कुंड यहां का एक प्रमुख स्थल है।
कैसे पहुंचें?
आप वाराणसी एयरपोर्ट या रेलवे स्टेशन पर पहुंचकर टैक्सी या ऑटो ले सकते हैं। पिशाच मोचन कुंड की दूरी लगभग 5 किलोमीटर है।
हरिद्वार, उत्तराखंड
हरिद्वार में गंगा के किनारे नारायणी शिला मंदिर में पिंडदान किया जा सकता है। यह स्थान पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए महत्वपूर्ण है।
कैसे पहुंचें?
हरिद्वार रेलवे स्टेशन यहां का निकटतम स्टेशन है। सड़क मार्ग से यह कई बड़े शहरों से जुड़ा हुआ है, और फ्लाइट से आने के लिए देहरादून जा सकते हैं।
उज्जैन, मध्य प्रदेश
महाकाल की नगरी उज्जैन पितृकर्म के लिए विशेष मानी जाती है। यहां सिद्धवट, गयाकोठा मंदिर, राम घाट और नृसिंह घाट पर पूजा और पिंडदान किया जाता है।
कैसे पहुंचें?
उज्जैन का निकटतम रेलवे स्टेशन है। यदि आप फ्लाइट से जाना चाहते हैं, तो इंदौर का देवी अहिल्याबाई होलकर एयरपोर्ट सबसे नजदीक है, जो उज्जैन से लगभग 53 किलोमीटर दूर है।
