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मलमास का समापन: 15 जून के बाद शुभ कार्यों की तैयारी करें

मलमास, जो भगवान श्रीहरि विष्णु को समर्पित है, 15 जून को समाप्त हो रहा है। इस दौरान स्नान, दान और साधना का महत्व है। 19 जून से विवाह के लिए शुभ मुहूर्त शुरू होंगे, जबकि चातुर्मास 25 जुलाई से आरंभ होगा, जिसमें कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जा सकेगा। जानें इस अवधि के महत्व और शुभ कार्यों की तैयारी के बारे में।
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मलमास का समापन: 15 जून के बाद शुभ कार्यों की तैयारी करें

भगवान श्रीहरि विष्णु को समर्पित मास


Malmas, नई दिल्ली: वर्तमान में अधिकमास चल रहा है, जो हर तीन साल में आता है। यह मास 15 जून को समाप्त होगा, जबकि इसकी शुरुआत 17 मई को हुई थी। इसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है, जो भगवान श्रीहरि विष्णु को समर्पित है।


मलमास का महत्व और शुभ कार्य

मलमास को स्नान, दान, जप, तप और साधना का महीना माना जाता है। इस दौरान इन कार्यों से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। इस माह में विवाह, सगाई, नामकरण, मुंडन संस्कार और गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं, क्योंकि यह सांसारिक सुखों से दूर रहने का समय होता है। 15 जून के बाद से शुभ कार्यों की शुरुआत होगी, लेकिन 25 जुलाई से पहले सभी कार्य निपटा लेने की सलाह दी जाती है।


मलमास के बाद विवाह मुहूर्त

मलमास के समाप्त होते ही 19 जून से विवाह के लिए शुभ मुहूर्त शुरू होंगे। ज्योतिषियों के अनुसार, जून में 19, 21, 22, 23, 24, 25, 26, 27, 28 और 29 तारीख को विवाह के लिए मुहूर्त हैं। जुलाई में भी 01, 06, 07 और 11 तारीख को विवाह के लिए शुभ मुहूर्त उपलब्ध हैं।


चातुर्मास का महत्व

हिंदू धर्म में चातुर्मास का विशेष महत्व है, जिसमें कई महत्वपूर्ण व्रत और त्योहार आते हैं। यह वह अवधि है जब भगवान श्रीहरि विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं। चातुर्मास चार महीनों का होता है और इसकी शुरुआत देवशयनी एकादशी से होती है, जबकि समापन देवउठनी एकादशी पर होता है।


25 जुलाई से शुभ कार्यों पर रोक

पंचांग के अनुसार, 2026 में चातुर्मास का आरंभ 25 जुलाई को आषाढ़ शुक्ल पक्ष की देवशयनी एकादशी से होगा। यह पवित्र अवधि लगभग 119 दिनों तक चलेगी और 20 नवंबर को समाप्त होगी। इस दौरान कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जा सकेगा, इसलिए पंडित और ज्योतिषी 25 जुलाई से पहले सभी कार्य निपटाने की सलाह दे रहे हैं।