विश्वकर्मा पूजा का महत्व और शुभ मुहूर्त 2026
विश्वकर्मा पूजा का महत्व
हिंदू धर्म में विश्वकर्मा पूजा का एक विशेष स्थान है। भगवान विश्वकर्मा को देवताओं के शिल्पकार और वास्तुकार के रूप में जाना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, उन्होंने देवताओं के लिए अस्त्र-शस्त्र और भव्य महलों का निर्माण किया। यह पर्व हर साल कन्या संक्रांति के दिन मनाया जाता है।
विश्वकर्मा पूजा 2026 की तिथि
विश्वकर्मा पूजा हर साल कन्या संक्रांति के दिन होती है, जो तब होती है जब सूर्य कन्या राशि में प्रवेश करता है। इस वर्ष, सूर्य 17 सितंबर को कन्या राशि में प्रवेश करेगा, और इसी दिन विश्वकर्मा पूजा का आयोजन किया जाएगा।
पूजा का शुभ मुहूर्त
- सामान्य मुहूर्त: चल चौघड़िया सुबह 10:43 से 12:16 बजे तक।
- उत्तम मुहूर्त: लाभ चौघड़िया दोपहर 12:16 से 1:48 बजे तक।
- उत्तम मुहूर्त: अमृत चौघड़िया दोपहर 1:48 से 3:20 बजे तक।
भगवान विश्वकर्मा की पूजा के लिए दोपहर का समय सबसे उपयुक्त माना जाता है।
विश्वकर्मा पूजा की विधि
- पूजा स्थल को अच्छे से साफ करें और भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा स्थापित करें।
- कलश की स्थापना करें और हाथ में थोड़ा अक्षत और जल लेकर पूजा का संकल्प लें।
- भगवान विश्वकर्मा को जल, अक्षत, रोली, फूल और मिठाई अर्पित करें।
- कार्यस्थल पर उपयोग होने वाली मशीनों और वाहनों की पूजा करें।
- अंत में भगवान विश्वकर्मा की कथा का पाठ करें और उनकी आरती के साथ पूजा समाप्त करें।
- प्रसाद वितरित करने के बाद स्वयं भी प्रसाद ग्रहण करें।
