शारदीय नवरात्रि: घटस्थापना की विधि और शुभ मुहूर्त
नवरात्रि का महत्व और पूजा विधि
नई दिल्ली: शारदीय नवरात्रि का पर्व मां दुर्गा की पूजा के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दौरान भक्तजन मां दुर्गा के नौ रूपों की आराधना करते हैं, जिससे घर में सुख, समृद्धि और शांति की कामना की जाती है। इस पावन पर्व की शुरुआत कलश स्थापना, जिसे घटस्थापना भी कहा जाता है, से होती है। विधिपूर्वक कलश स्थापना करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
इस वर्ष शारदीय नवरात्रि का आरंभ 11 अक्टूबर, रविवार को होगा। इसी दिन कलश स्थापना की जाएगी। इसके लिए सुबह 6:19 से 10:12 बजे तक का समय शुभ माना गया है। अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:44 से 12:31 बजे तक रहेगा। इस दिन मां दुर्गा की पूजा और नौ दिनों तक चलने वाले धार्मिक अनुष्ठानों की शुरुआत होगी।
कलश स्थापना के लिए एक चौड़े मुंह वाला मिट्टी का पात्र, साफ मिट्टी, जौ, कलश, गंगाजल, शुद्ध पानी, सिक्का, सुपारी, साबुत चावल (अक्षत), दूर्वा, रोली, कलावा, आम या अशोक के पांच या सात पत्ते और पानी वाला नारियल की आवश्यकता होती है। इसके अलावा लाल कपड़ा या चुनरी, फूल, फल, पान, इलायची, लौंग, घी का दीपक, मिठाई और बताशे भी पूजा में शामिल किए जाते हैं।
नवरात्रि के पहले दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ कपड़े पहनें। इसके बाद पूजा स्थल की सफाई करें। एक लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर मां दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। फिर पूजा स्थल पर गंगाजल छिड़ककर शुद्धिकरण करें और माता रानी को फूल, चुनरी और श्रृंगार की सामग्री अर्पित करें।
अब मिट्टी के पात्र में साफ मिट्टी डालें और उसमें जौ बो दें। इसके ऊपर हल्की मिट्टी की परत डालकर थोड़ा पानी छिड़कें। इसके बाद पात्र को पूजा स्थल पर रखें। नवरात्रि के नौ दिनों तक जौ में थोड़ा-थोड़ा पानी डालते रहें, ताकि उनमें अंकुर निकल सकें।
अब कलश पर कलावा बांधें और उसमें गंगाजल और साफ पानी भरें। इसके बाद साबुत सुपारी, सिक्का, अक्षत और हल्दी की गांठ जैसी शुभ वस्तुएं डालें। कलश के मुख पर आम या अशोक के पांच या सात पत्ते रखें और ऊपर नारियल स्थापित करें। अब कलश को जौ वाले पात्र के पास रखें और मां दुर्गा के सामने घी का दीपक जलाएं। धूप, फूल, फल और मिठाई अर्पित करके मां दुर्गा के मंत्रों का जाप करें और आरती करें।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जौ को समृद्धि और अच्छी फसल का प्रतीक माना जाता है। नवरात्रि में जौ बोना नई शुरुआत और खुशहाली से जुड़ा होता है। मान्यता है कि जौ का अच्छी तरह अंकुरित होना शुभ संकेत होता है।
