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साप्ताहिक सत्संग में साध्वी मेधावी भारती ने ध्यान की शक्ति पर प्रकाश डाला

जालंधर में दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के बिधीपुर आश्रम में आयोजित साप्ताहिक सत्संग में साध्वी मेधावी भारती ने ध्यान की महत्ता पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी में नकारात्मक विचारों का प्रभाव हमारे मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है। साध्वी जी ने ध्यान को एक शक्तिशाली उपकरण बताया, जो नकारात्मकता को नियंत्रित कर सकारात्मकता लाता है। इस कार्यक्रम में बच्चों द्वारा भजन संकीर्तन भी प्रस्तुत किया गया।
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साप्ताहिक सत्संग में साध्वी मेधावी भारती ने ध्यान की शक्ति पर प्रकाश डाला

साप्ताहिक सत्संग का आयोजन

जालंधर: दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के बिधीपुर आश्रम में एक साप्ताहिक सत्संग का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में गुरुदेव श्री आशुतोष महाराज जी की शिष्या साध्वी मेधावी भारती जी ने प्रवचन दिया। यह आयोजन श्रद्धा, उत्साह और आध्यात्मिक ऊर्जा से भरा हुआ था।


साध्वी जी ने अपने विचारों में बताया कि आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी में हमारा मन विचारों के चौराहे पर खड़ा है, जहाँ हर समय विचारों की भीड़ होती है। एक अध्ययन के अनुसार, मनुष्य के दिमाग में प्रतिदिन हजारों विचार आते हैं, जिनमें से अधिकांश नकारात्मक होते हैं। ये नकारात्मक विचार धीरे-धीरे हमारे मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करते हैं। ऐसे में, ध्यान एक प्रभावी साधन है, जो न केवल नकारात्मक विचारों को नियंत्रित करता है, बल्कि हमारे जीवन में सकारात्मकता भी लाता है।


साध्वी जी ने यह भी बताया कि ध्यान हमें वर्तमान में जीने की कला सिखाता है। यह हमें अतीत की चिंता और भविष्य के डर से मुक्त करता है। विपरीत परिस्थितियों में भी, व्यक्ति अवसर और आशा की किरण देखना सीख जाता है।


उन्होंने नकारात्मक विचारों के प्रभाव को समझाते हुए कहा कि ये विचार दीमक की तरह होते हैं, जो व्यक्ति को अंदर से खोखला कर देते हैं। जब हम चिंता, डर, ईर्ष्या या हीन भावना से घिरे रहते हैं, तो इसका गहरा असर हमारे मन और शरीर पर पड़ता है।


इसलिए, नकारात्मक विचार अनचाहे मेहमानों की तरह होते हैं, जो आएंगे ही। लेकिन उन्हें अपने मन में टिकाए रखना या नहीं, यह पूरी तरह से हमारे हाथ में है। ध्यान वह चाबी है, जो हमें अपने मन का मालिक बनाती है। यदि हम ध्यान को अपनी दिनचर्या में शामिल कर लें, तो हम नकारात्मकता के बादलों को चीरकर सकारात्मकता के सूर्य को जगा सकते हैं। स्वस्थ मन ही एक सुंदर और सफल जीवन का आधार है। सभी धार्मिक ग्रंथों का यही संदेश है कि जब एक पूर्ण सद्गुरु साधक को ब्रह्म ज्ञान की दीक्षा देते हैं, तो ध्यान की शाश्वत प्रक्रिया आरंभ होती है। इससे साधक अपने भीतर सत् चित्त आनंद को प्राप्त करता है। ईश्वर से एकात्मता साधक के जीवन को हर पल एक दिव्य पर्व बना देती है। अंत में, बच्चों ने भजन संकीर्तन प्रस्तुत किया।