सावन सोम प्रदोष व्रत: पूजा विधि और शुभ मुहूर्त
जानें सावन सोम प्रदोष व्रत की तिथि और महत्व
Sawan Som Pradosh Vrat, नई दिल्ली: हर महीने की कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत का आयोजन किया जाता है। इस दिन जो वार होता है, उसी के नाम पर यह व्रत रखा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, प्रदोष व्रत के दिन उपवास और पूजा करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है। इस दिन की गई शिव पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है।
कहा जाता है कि प्रदोष व्रत करने से जीवन के सभी दुख दूर होते हैं और महादेव का आशीर्वाद हमेशा बना रहता है। इसके अलावा, मृत्यु के बाद आत्मा को शिव के चरणों में स्थान मिलता है। सावन के महीने में प्रदोष व्रत का महत्व और भी बढ़ जाता है। इस वर्ष सावन में सोम प्रदोष व्रत का विशेष महासंयोग बन रहा है।
द्रिक पंचांग के अनुसार, सावन माह 30 जुलाई से शुरू होकर 28 अगस्त तक चलेगा। 10 अगस्त को सोमवार है, जब सोम प्रदोष का व्रत रखा जाएगा। आइए जानते हैं सावन के सोम प्रदोष व्रत की पूजा का शुभ मुहूर्त और विधि।
सावन सोम प्रदोष व्रत तिथि
द्रिक पंचांग के अनुसार, सावन माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 10 अगस्त, सोमवार को सुबह 08 बजे शुरू होगी और इसका समापन 11 अगस्त, मंगलवार को सुबह 04:54 बजे होगा। इस प्रकार, प्रदोष काल को ध्यान में रखते हुए, 10 अगस्त को सावन माह का सोम प्रदोष व्रत किया जाएगा।
सावन सोम प्रदोष व्रत पूजा मुहूर्त
द्रिक पंचांग के अनुसार, सोम प्रदोष व्रत के दिन प्रदोष काल का समय शाम 07:05 बजे शुरू होगा और यह रात 09:14 बजे तक रहेगा। इस दिन शिव भक्तों को पूजा के लिए 02 घंटे 09 मिनट का समय मिलेगा।
प्रदोष व्रत पूजा विधि
सोम और भौम प्रदोष का व्रत करने वाले भक्तों को सुबह स्नान करना चाहिए। इसके बाद भगवान शिव का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें। शिवलिंग पर जल चढ़ाएं और शाम के समय प्रदोष काल में विधिवत पूजा-अर्चना करें।
शिवलिंग का जल, दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से अभिषेक करें। इसके बाद बेलपत्र, धतूरा, चंदन और पुष्प अर्पित करें। पूजा के दौरान ॐ नम: शिवाय और महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें। प्रदोष व्रत की कथा का पाठ करें और अंत में आरती से पूजा का समापन करें।
