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हनुमान जी और मातंग आदिवासी: एक रहस्यमयी संबंध

हनुमान जी की पूजा का ज्येष्ठ माह में विशेष महत्व है। इस दौरान, हर 41 वर्ष में हनुमान जी मातंग आदिवासियों से मिलने आते हैं। यह रहस्यमयी संबंध और उनकी कथाएँ जानने के लिए पढ़ें। मातंग कबीले के लोग हनुमान जी की सेवा करते हैं और उनके आगमन के समय विशेष विधियों का पालन करते हैं।
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हनुमान जी और मातंग आदिवासी: एक रहस्यमयी संबंध

हनुमान जी और मातंग आदिवासी

हनुमान जी और मातंग आदिवासी: ज्येष्ठ माह में हनुमान जी की पूजा का विशेष महत्व होता है। इस माह को हनुमान जी को समर्पित माना जाता है, और इस दौरान उनकी कथाएँ सुनने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, हर 41 वर्ष में हनुमान जी आदिवासियों से मिलने आते हैं। कथा के अनुसार, जब प्रभु श्रीराम ने अपनी लीला समाप्त की, तब हनुमान जी दक्षिण भारत के जंगलों और श्रीलंका के पहाड़ों की ओर चले गए।

ऐसा माना जाता है कि श्रीलंका के जंगलों में रहने वाले मातंग कबीले के लोग आज भी हनुमान जी की सेवा करते हैं। इन आदिवासियों को स्थानीय भाषा में 'पिहरूंगा' (Pihurunga) कहा जाता है। हनुमान जी हर 41 वर्ष बाद इस रहस्यमय कबीले के लोगों से मिलने और उन्हें आध्यात्मिक ज्ञान देने आते हैं।

रहस्यमयी आगमन: कबीले के लोगों का कहना है कि हनुमान जी जब भी आते हैं, केवल इसी समुदाय को दिखाई देते हैं और उनके साथ समय बिताते हैं।

पूजा और विधि: इस आगमन के दौरान, कबीले का मुखिया हनुमान जी के साथ हुई बातचीत और उनकी लीलाओं को एक विशेष 'समय पुस्तिका' (Logbook) में दर्ज करता है।