आईआईटी इंदौर की नई तकनीक से लार से होगा मुख कैंसर का पता
मुख कैंसर की पहचान के लिए नई तकनीक
इंदौर स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) के शोधकर्ताओं ने एक ऐसी तकनीक विकसित की है, जिसके माध्यम से बिना किसी शल्य चिकित्सा या दर्द के, केवल लार और मुंह के अंदरूनी सतह से लिए गए स्वैब के जरिए मुख कैंसर के प्रारंभिक संकेतों की पहचान की जा सकती है। यह जानकारी अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को साझा की।
इस तकनीक की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि यह बीमारी के स्पष्ट लक्षण या घाव प्रकट होने से पहले ही शरीर में होने वाले आणविक परिवर्तनों की पहचान कर सकती है।
आईआईटी इंदौर के प्रोफेसर हेमचंद्र झा के नेतृत्व में विकसित इस तकनीक में मुख्य रूप से दो स्थितियों का अध्ययन किया गया है: ‘ओरल सबम्यूकस फाइब्रोसिस’ (गुटखा, सुपारी या तंबाकू के सेवन से मुंह का सिकुड़ना) और ‘ओरल स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा’ (मुख कैंसर का सबसे सामान्य प्रकार)।
शोधकर्ताओं ने यह पाया कि कैंसर के प्रारंभिक चरण में मरीज के शरीर में ऊर्जा प्रबंधन, वसा और रोग प्रतिरोधक क्षमता से संबंधित सूक्ष्म आणविक परिवर्तन होने लगते हैं, और लार तथा स्वैब के नमूनों की जांच के माध्यम से इन परिवर्तनों की प्रारंभिक पहचान की जा सकती है।
फिलहाल, मुख कैंसर की पुष्टि के लिए ‘बायोप्सी’ की प्रक्रिया अपनाई जाती है, जिसमें प्रभावित हिस्से से ऊतक का नमूना लिया जाता है। यह प्रक्रिया मरीज के लिए दर्दनाक हो सकती है और इसे बार-बार करना व्यावहारिक नहीं होता।
इसके विपरीत, नई विधि में किसी प्रकार की शल्य चिकित्सा की आवश्यकता नहीं होती, और यह कम लागत वाली तथा त्वरित जांच के लिए उपयोगी हो सकती है। इससे दूर-दराज और ग्रामीण क्षेत्रों में मुख कैंसर की प्रारंभिक जांच को सरल बनाने में मदद मिल सकती है।
इस शोध के निष्कर्ष अंतरराष्ट्रीय पत्रिका ‘ब्रिटिश जर्नल ऑफ कैंसर’ में प्रकाशित हुए हैं, और संस्थान ने इसके लिए पेटेंट आवेदन भी किया है। अब शोधकर्ता इन निष्कर्षों का सत्यापन बड़े और विविध मरीज समूह में करने की योजना बना रहे हैं।
