काशी के प्रमुख मंदिर: मोक्ष की प्राप्ति के लिए अनिवार्य दर्शन
काशी का महत्व
काशी को मोक्षदायिनी नगरी माना जाता है। यह मान्यता है कि यदि कोई व्यक्ति अपने जीवन में एक बार भी काशी के दर्शन कर ले, तो उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। हालांकि, मोक्ष प्राप्त करना इतना सरल नहीं है। स्कंद पुराण के 'काशी खंड' में कहा गया है कि केवल विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग के दर्शन से काशी की यात्रा पूरी नहीं होती।
काशी के अन्य महत्वपूर्ण मंदिर
हिंदू धर्म में कई तीर्थ स्थल हैं, जिनका धार्मिक महत्व अलग-अलग है। लेकिन काशी विश्वनाथ को हिंदू धर्म का एक अत्यंत पवित्र स्थल माना गया है। यहां की यात्रा कुछ विशेष मंदिरों के दर्शन के बाद ही पूरी होती है।
काल भैरव मंदिर
काशी के कोतवाल काल भैरव हैं। काशी में प्रवेश करते ही सबसे पहले इनके दरबार में जाना आवश्यक है। काल भैरव की अनुमति के बिना काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग के दर्शन संभव नहीं हैं।
माता अन्नपूर्णा मंदिर
ज्योतिर्लिंग के दर्शन के बाद मां अन्नपूर्णा के दर्शन करना अनिवार्य है। उन्हें काशी की अन्न की देवी माना जाता है। पुराणों में कहा गया है कि जो भी यहां आता है, उसे जीवन में कभी भी अन्न की कमी नहीं होती।
धुंडीराज विनायक मंदिर
काशी विश्वनाथ मंदिर के प्रवेश द्वार पर गणेश जी का प्राचीन मंदिर स्थित है। इनके दर्शन के बिना ज्योतिर्लिंग के दर्शन अधूरे माने जाते हैं। धुंडीराज के दर्शन के बाद ही भगवान शिव के दर्शन होते हैं।
बिंदु माधव मंदिर
बिंदु माधव मंदिर वाराणसी के पंचगंगा घाट पर है। यहां भगवान श्रीहरि विष्णु विराजमान हैं। धार्मिक मान्यता है कि यहीं भगवान विष्णु ने महादेव की तपस्या की थी। इनके दर्शन के बिना काशी की यात्रा अधूरी मानी जाती है।
विशालाक्षी मंदिर
51 शक्तिपीठों में से एक विशालाक्षी मंदिर भी इस यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह मणिकर्णिका घाट पर स्थित है। यहां मां सती के दाहिने कान का कुंडल गिरा था, इसलिए देवी के दर्शन करना आवश्यक है।
दंडपाणि मंदिर
दंडपाणि मंदिर काशी के प्राचीन मंदिरों में से एक है। यहां की विशेषता यह है कि यहां काशी के न्यायाधीश हरिकेश देव की पूजा होती है। कहा जाता है कि वे हाथ में छड़ी लिए हुए हैं और काशी में किसी भी गलत व्यक्ति को नहीं रहने देते।
निष्कर्ष
यदि आप काशी यात्रा पर जा रहे हैं, तो इन मंदिरों के दर्शन करना न भूलें।
