जन्माष्टमी पर दयालबाग में भव्य भंडारे का आयोजन
जन्माष्टमी का पावन अवसर
देश-विदेश से सत्संगी भाई-बहनों और जिज्ञासु साधकों का आगमन हो रहा है। सुबह पवित्र आरती का आयोजन किया जाएगा, जबकि दूसरे सत्र में खेतों में भंडारे का आयोजन होगा।
दयालबाग में भंडारे का आयोजन
आगरा: जन्माष्टमी के खास मौके पर राधास्वामी मत के संस्थापक सतगुरु परम पुरुष पूरन धनी हुजूर सोामी जी महाराज की जन्म जयंती के उपलक्ष्य में शुक्रवार को दयालबाग, आगरा में भव्य भंडारे का आयोजन श्रद्धा और भक्ति के साथ किया जा रहा है। इस अवसर पर देश के विभिन्न राज्यों और विदेशों से बड़ी संख्या में सत्संगी भाई-बहन और पंजीकृत जिज्ञासु प्रतिभागी दयालबाग पहुंच रहे हैं।
सतगुरु का जन्म और शिक्षाएं
हुजूर सोामी जी महाराज का जन्म 24-25 अगस्त, 1818 को आगरा की पन्नी गली में सेठ शिव दयाल सिंह जी के रूप में हुआ था। उन्होंने निज घर तक पहुंचने के लिए सुरत-शब्द-योग को आध्यात्मिक मार्ग के रूप में प्रस्तुत किया। 15 फरवरी 1861 को बसंत पंचमी के दिन उन्होंने सार्वजनिक राधास्वामी सत्संग की शुरुआत की।
भंडारा सप्ताह का आयोजन
2 से 6 सितंबर तक मनाया जाएगा भंडारा सप्ताह: हुजूर सोामी जी महाराज की जन्म जयंती के उपलक्ष्य में 2 से 6 सितंबर तक भंडारा सप्ताह मनाया जाएगा। 4 सितंबर को यह अवसर देश के विभिन्न सत्संग केंद्रों और विदेशों में श्रद्धा के साथ मनाया जाएगा। आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, पूर्वी राज्यों और यूरोप से सत्संगी भाई-बहनों और जिज्ञासु प्रतिभागियों के दयालबाग पहुंचने की व्यवस्था की गई है।
आध्यात्मिक अनुशासन का महत्व
राधास्वामी गुरु परंपरा में परम: आदरणीय हुजूर प्रो. प्रेम सरन सत्संगी साहब दयालबाग के वर्तमान संत सतगुरु हैं। 4 सितंबर को प्रातःकाल पवित्र आरती का आयोजन होगा, इसके बाद दयालबाग के खेतों में भंडारे का आयोजन किया जाएगा। पूरे कार्यक्रम में श्रद्धा, सेवा और आध्यात्मिक अनुशासन का विशेष वातावरण रहेगा।
दयालबाग की जीवन-पद्धति
दयालबाग की जीवन-पद्धति आध्यात्मिकता के साथ सेवा, सादगीपूर्ण जीवन, शिक्षा, कृषि और सामुदायिक जीवन के अनूठे समन्वय के लिए जानी जाती है। यह परंपरा हुजूर सोामी जी महाराज की शिक्षाओं से प्रेरित होकर आध्यात्मिक साधना के साथ समाज सेवा और सामूहिक जीवन को महत्व देती है।
