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धनतेरस पर पूजा और खरीदारी के लिए शुभ मुहूर्त की जानकारी

धनतेरस पर पूजा और खरीदारी के लिए शुभ मुहूर्त की जानकारी प्राप्त करें। 6 नवंबर को होने वाले इस विशेष दिन के लिए पंचांग के अनुसार महत्वपूर्ण समय और तिथियों का उल्लेख किया गया है। जानें कब करना है पूजा और खरीदारी, और किन समयों से बचना चाहिए। यह जानकारी आपके लिए धनतेरस के अवसर पर लाभकारी साबित हो सकती है।
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धनतेरस का महत्व और पंचांग की जानकारी

नई दिल्ली - हिंदू धर्म में पंचांग का अत्यधिक महत्व होता है। किसी भी शुभ कार्य, पूजा, यात्रा, निवेश या नए कार्य की शुरुआत से पहले पंचांग का अवलोकन करना आवश्यक माना जाता है। यह माना जाता है कि शुभ मुहूर्त में किए गए कार्यों से सकारात्मक परिणाम प्राप्त होते हैं।


पंचांग के अनुसार, 6 नवंबर को कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि होगी, जो सुबह 10:32 बजे तक रहेगी। इसके बाद त्रयोदशी तिथि प्रारंभ होगी। इस दिन धनतेरस मनाया जाएगा। इस दिन हस्त नक्षत्र और विष्कुम्भ योग का संयोग रहेगा। करण की बात करें तो सुबह 10:30 बजे तक तैतिल करण रहेगा, इसके बाद गर करण लग जाएगा। शुक्रवार का दिन माता लक्ष्मी और शुक्र देव को समर्पित माना जाता है, इसलिए इस दिन पूजा-पाठ और धार्मिक कार्यों का विशेष महत्व होता है।


नई दिल्ली के समय के अनुसार, 6 नवंबर को सूर्योदय सुबह 6:36 बजे होगा, जबकि सूर्यास्त शाम 5:32 बजे होगा। इस दिन चंद्रमा कन्या राशि में स्थित रहेंगे। ज्योतिष शास्त्र में सूर्य और चंद्रमा की स्थिति को महत्वपूर्ण माना जाता है, और पंचांग में इनकी स्थिति के आधार पर दिन के शुभ और अशुभ समय की गणना की जाती है।


अभिजीत मुहूर्त शुभ कार्यों के लिए बहुत अच्छा माना जाता है। 6 नवंबर को अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:36 बजे से दोपहर 12:22 बजे तक रहेगा। इस समय के दौरान नए कार्यों की शुरुआत, पूजा-पाठ और अन्य शुभ कार्य किए जा सकते हैं।


धनतेरस के अवसर पर पूजा और खरीदारी के लिए प्रदोष काल का विशेष महत्व है। पूजा का शुभ समय शाम 5:49 बजे से रात 8:23 बजे तक रहेगा। खास बात यह है कि शाम 6:21 बजे से रात 8:14 बजे तक हस्त नक्षत्र में खरीदारी और पूजा के लिए शुभ संयोग बन रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस समय माता लक्ष्मी और भगवान धन्वंतरि की पूजा करना शुभ माना जाता है।


6 नवंबर को राहुकाल सुबह 10:43 बजे से दोपहर 12:05 बजे तक रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, राहुकाल के दौरान कोई नया या मांगलिक कार्य शुरू करने से बचना चाहिए, हालांकि इस समय पहले से चल रहे नियमित कार्य किए जा सकते हैं।


शुक्रवार को पश्चिम दिशा में दिशाशूल रहेगा। मान्यता है कि इस दिशा में यात्रा करने से बचना चाहिए, लेकिन यदि किसी आवश्यक कार्य से यात्रा करनी पड़े तो धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कुछ पारंपरिक उपाय करके घर से निकलना चाहिए।