नाग पंचमी: सावन के तीसरे सोमवार पर तवे का उपयोग न करें
नाग पंचमी का महत्व
सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है, और इसी दौरान नाग पंचमी का पर्व भी आता है, जिसका धार्मिक महत्व अत्यधिक है। इस वर्ष नाग पंचमी 17 अगस्त, सोमवार को मनाई जाएगी। खास बात यह है कि इस बार नाग पंचमी और सावन का तीसरा सोमवार एक साथ आ रहा है।
तवे का उपयोग क्यों न करें?
देश के विभिन्न हिस्सों में नाग पंचमी के अवसर पर कई परंपराएं देखने को मिलती हैं। इनमें से एक परंपरा यह है कि इस दिन लोहे के तवे का उपयोग नहीं किया जाता। कई परिवार इस दिन रोटी बनाने के बजाय पहले से तैयार भोजन का सेवन करते हैं।
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, लोहे के तवे को राहु से जोड़ा जाता है, जबकि रसोई की आग को मंगल ग्रह से। नाग पंचमी के दिन लोहे के बर्तनों को गर्म करने से बचने की सलाह दी जाती है।
नाग पंचमी पर रोटी बनाने से बचें
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नाग पंचमी के दिन तवे पर रोटी बनाना शुभ नहीं माना जाता। तवे को नाग देवता के फन और राहु ग्रह का प्रतीक माना जाता है। इस दिन तवे का उपयोग करने से नाग देवता का अपमान होता है और राहु के नकारात्मक प्रभाव बढ़ सकते हैं।
- नाग फन का प्रतीक: गोल और चपटा तवा सर्प के फन का प्रतिनिधित्व करता है।
- राहु का संबंध: ज्योतिष में लोहे के तवे को राहु ग्रह का प्रतीक माना गया है।
- नकारात्मक प्रभाव: इस दिन तवे के उपयोग से नकारात्मकता और कष्ट बढ़ सकते हैं।
- जीवों का सम्मान: धारदार वस्तुओं का उपयोग न करने की परंपरा है।
- इस दिन क्या बनाएं: रोटी की जगह पूरी, कचौड़ी, पुए या खीर-तलाई जैसी चीजें बनाई जाती हैं।
राहु-केतु और कालसर्प दोष
नाग पंचमी को राहु-केतु और कालसर्प दोष से भी जोड़ा जाता है। नाग देवता की पूजा के माध्यम से इनसे जुड़े अशुभ प्रभावों को कम करने की प्रार्थना की जाती है। इस दिन कुछ लोग विशेष सावधानियां बरतते हैं और लोहे के बर्तनों को आग पर न चढ़ाने की परंपरा का पालन करते हैं।
इस दिन क्या करें?
यदि घर में इस परंपरा का पालन किया जाता है, तो नाग पंचमी के दिन भोजन पहले से तैयार किया जा सकता है। मिट्टी, तांबे या पीतल के बर्तनों का उपयोग भी शुभ माना जाता है। इसके अलावा, चांदी या तांबे से बने नाग-नागिन के जोड़े का दान करना भी लाभकारी होता है।
मंत्रों का जाप
- ॐ नागराजाय नम: इस मंत्र का जाप नाग देवता का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए किया जाता है।
- ॐ नागाय नम: यह नाग देवता का सामान्य मंत्र है।
- नाग गायत्री मंत्र: ॐ भुजंगेशाय विद्महे, सर्पराजाय धीमहि, तन्नो नाग: प्रचोदयात्।
- सर्प नमस्कार मंत्र: धरती, आकाश और अंतरिक्ष में मौजूद सभी सर्पों को नमन करने के लिए।
नाग पंचमी शुभ मुहूर्त
इस साल पंचमी तिथि 16 अगस्त की शाम 04:52 बजे शुरू होगी और 17 अगस्त की शाम 05:00 बजे समाप्त होगी। पूजा के लिए शुभ समय सुबह 05:51 बजे से 08:29 बजे तक है। इस बार नाग पंचमी पर सावन का तीसरा सोमवार भी पड़ रहा है, जिससे नाग देवता और भगवान शिव की पूजा का महत्व और बढ़ जाता है।
