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पंजाब में डेटा सुरक्षा प्रणाली को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर

पंजाब के सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अमन अरोड़ा ने आज एक कार्यशाला में डेटा सुरक्षा प्रणाली को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि डेटा अब एक नई सार्वजनिक संपत्ति है और इसकी सुरक्षा नागरिकों के विश्वास को बनाए रखने के लिए आवश्यक है। कार्यशाला में विभिन्न सरकारी विभागों के प्रतिनिधियों ने साइबर सुरक्षा के उपायों पर चर्चा की। जानें इस महत्वपूर्ण विषय पर और क्या बातें हुईं।
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डेटा सुरक्षा पर कार्यशाला का आयोजन

चंडीगढ़- पंजाब के सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अमन अरोड़ा ने आज सभी सरकारी विभागों में मजबूत डेटा सुरक्षा प्रणाली की स्थापना की आवश्यकता पर बल दिया। यह बयान उन्होंने 'राज्य के डेटा के लिए साइबर सुरक्षा ढांचे को मजबूत करना' विषय पर आयोजित राज्य स्तरीय कार्यशाला में दिया।


उन्होंने प्रौद्योगिकी को एक दोधारी तलवार बताते हुए कहा कि यह लाभदायक हो सकती है, लेकिन इसके साथ जुड़े जोखिमों को भी ध्यान में रखना आवश्यक है। डेटा का सही प्रबंधन करना बेहद महत्वपूर्ण है।


अमन अरोड़ा ने कहा, "डेटा अब एक नई सार्वजनिक संपत्ति बन चुका है। नागरिकों के रिकॉर्ड और सरकारी डेटाबेस की सुरक्षा डिजिटल शासन में लोगों के विश्वास को बनाए रखने के लिए आवश्यक है। पंजाब विभिन्न क्षेत्रों में अपने डिजिटल दायरे को बढ़ा रहा है, इसलिए हमें अपने डिजिटल सिस्टम की सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी।"


उन्होंने कहा कि जब नागरिक सरकारी सेवाओं का लाभ उठाने के लिए अपना डेटा साझा करते हैं, तो उन्हें यह विश्वास होना चाहिए कि उनका डेटा सुरक्षित है। इस विश्वास को बनाए रखना हमारी प्राथमिकता है।


मंत्री ने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे एकजुट होकर काम करें और उभरते डिजिटल खतरों का सामना करने के लिए राज्य की प्रणालियों को लगातार अपडेट करें।


कार्यशाला का आयोजन भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा जारी ढांचों के अनुसार किया गया, जिसका उद्देश्य राज्य स्तर पर साइबर सुरक्षा की तैयारी का मूल्यांकन करना था।


डी.जी.जी.आई.टी. के अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. डी.के. तिवारी ने पंजाब के डिजिटल बुनियादी ढांचे के बारे में जानकारी दी और सभी सरकारी विभागों से 'सिक्योर-बाय-डिज़ाइन' सिद्धांत अपनाने की अपील की।


कार्यशाला में तकनीकी प्रस्तुतियाँ भी दी गईं, जिसमें एयरटेल और वेरोनिस जैसी कंपनियों ने डेटा सुरक्षा के उपायों पर अपने विचार साझा किए।


इस कार्यशाला में विभिन्न राज्य विभागों के प्रतिनिधियों ने जोखिम-आधारित सुरक्षा का आकलन किया और राष्ट्रीय सुरक्षा दिशा-निर्देशों पर चर्चा की।


सभी संकलित जानकारी को सुशासन एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा एक व्यापक रिपोर्ट में तैयार किया जाएगा, जिसे आगामी राष्ट्रीय विभागीय सम्मेलन में प्रस्तुत किया जाएगा।


इस कार्यशाला में कई वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए, जिनमें डी.जी.जी.आई.टी. के निदेशक श्री विशेष सारंगल और विशेष सचिव गृह श्री परमिंदरपाल सिंह शामिल थे।