बुर्ज खलीफा: पानी की आपूर्ति का रहस्य
दुबई का अद्भुत बुर्ज खलीफा
दुबई: बुर्ज खलीफा, जो कि दुनिया की सबसे ऊंची इमारत है, की ऊंचाई 828 मीटर है और इसमें 163 मंजिलें हैं। इस गगनचुंबी इमारत को देखकर यह सवाल उठता है कि इतनी ऊंचाई तक पानी कैसे पहुंचता है। क्या इसके लिए कोई विशाल पंप काम करता है या फिर इसके पीछे कोई विशेष तकनीक है? दिलचस्प बात यह है कि यहां पानी की आपूर्ति सामान्य इमारतों की तरह नहीं होती। इतनी ऊंचाई पर सीधे एक पंप से पानी भेजना न केवल कठिन है, बल्कि खतरनाक भी हो सकता है। यदि नीचे से अत्यधिक दबाव बनाया जाए, तो पाइप फट सकते हैं और पानी का दबाव ऊपर पहुंचते-पहुंचते बहुत कम हो जाएगा।
समुद्र के खारे पानी से बुर्ज खलीफा की प्यास बुझती है
बुर्ज खलीफा तक पहुंचने वाला पानी दरअसल दुबई के डीसैलिनेशन प्लांट्स से आता है, जहां समुद्र के खारे पानी को साफ करके पीने योग्य बनाया जाता है। इस इमारत को प्रतिदिन लगभग एक हजार क्यूबिक मीटर यानी करीब ढाई लाख गैलन पानी की आवश्यकता होती है। इतनी बड़ी मात्रा में पानी की आपूर्ति के लिए एक जटिल और आधुनिक इंजीनियरिंग प्रणाली का उपयोग किया जाता है, जिसे अमेरिकी कंपनी जाइलम इंक ने विकसित किया है। यह प्रणाली पेड़ों के ऊतकों से प्रेरित है, जो जड़ों से पानी खींचकर पत्तियों तक पहुंचाते हैं।
पानी की आपूर्ति का चरणबद्ध तरीका
बुर्ज खलीफा में पानी को एक बार में सीधे ऊपर नहीं भेजा जाता। इसके लिए मल्टी-स्टेज बूस्टर पंपिंग सिस्टम का उपयोग किया जाता है। सबसे पहले, बेसमेंट में लगे शक्तिशाली पंप पानी को ऊंचाई पर बने विशाल टैंकों में धकेलते हैं। इसके बाद, दूसरे पंप उस पानी को और ऊंचे टैंकों तक भेजते हैं। यह प्रक्रिया कई चरणों में होती है, जिससे पानी धीरे-धीरे और सुरक्षित तरीके से ऊपरी मंजिलों तक पहुंचता है। बुर्ज खलीफा के अंदर सात विशेष मेकेनिकल फ्लोर बनाए गए हैं, जहां जलाशय और पंपिंग सिस्टम स्थापित हैं।
100 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन
लगभग हर 20 से 30 मंजिल के बाद तकनीकी स्तर बनाए गए हैं, जो पानी को अगले हिस्से तक पहुंचाने का कार्य करते हैं। जब पानी ऊंचे टैंक तक पहुंचता है, तो उसे नीचे के फ्लोरों में गुरुत्वाकर्षण की मदद से सप्लाई किया जाता है। पानी का दबाव नियंत्रित रखने के लिए प्रेशर बूस्टर पंप और प्रेशर रिड्यूसिंग वॉल्व लगाए गए हैं, ताकि किसी भी मंजिल पर पानी का फोर्स बहुत ज्यादा या कम न हो। इस इमारत के भीतर पानी की सप्लाई के लिए 100 किलोमीटर से अधिक लंबी पाइपलाइन बिछाई गई है। इसके अलावा, इमारत के एसी सिस्टम से निकलने वाले लाखों गैलन पानी को भी बर्बाद नहीं किया जाता, बल्कि उसे इकट्ठा करके लैंडस्केपिंग और अन्य कार्यों में पुनः उपयोग किया जाता है।
