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महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती का दिव्य आयोजन

उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में आश्विन कृष्ण पक्ष चतुर्दशी पर भस्म आरती का आयोजन हुआ। इस अवसर पर श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या ने भाग लिया और बाबा महाकाल के दर्शन किए। भस्म आरती के दौरान मंदिर परिसर में मंत्रोच्चार और शंखध्वनि गूंजती रही। जानें इस दिव्य अनुभव के बारे में और कैसे श्रद्धालुओं ने इस अद्भुत आयोजन का हिस्सा बने।
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महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती का आयोजन

उज्जैन - श्री महाकालेश्वर मंदिर में आश्विन कृष्ण पक्ष चतुर्दशी के अवसर पर शुक्रवार को बाबा महाकाल की भस्म आरती का आयोजन किया गया। इस अद्भुत दृश्य का अनुभव करने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर परिसर में उपस्थित थे।


सुबह जल्दी भगवान वीरभद्र की अनुमति लेने के बाद ढोल-नगाड़ों के साथ बाबा महाकाल के कपाट खोले गए। दिव्य शृंगार और भस्म आरती के बाद श्रद्धालुओं को बाबा के दर्शन का अवसर मिला। इसके बाद मंदिर परिसर में 'जय श्री महाकाल' के उद्घोष गूंजने लगे। परिसर घंटियों, शंखध्वनि और मंत्रोच्चार से भर गया।


महाकाल मंदिर के पट खुलने के साथ ही मंत्रोच्चार के बीच भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया, जिसमें दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से बने पंचामृत का उपयोग किया गया।


बाबा महाकाल की पूजा के दौरान पहले घंटाल बजाकर हरिओम जल अर्पित किया गया। कपूर आरती के बाद बाबा ने मुकुट धारण किया। इसके बाद झांझ-मंजीरे, ढोल-नगाड़े और शंखनाद के साथ भस्म आरती का आयोजन हुआ।


बाबा महाकाल को राजा स्वरूप में सजाया गया और पंचामृत पूजन के साथ भस्म आरती की गई। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल की भस्म आरती के दर्शन किए। अपने आराध्य देव के दर्शन के लिए श्रद्धालु बुधवार रात से ही कतार में खड़े थे।


परंपरा के अनुसार, महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से बाबा महाकाल को भस्म आरती अर्पित की जाती है। मान्यता है कि भस्म अर्पित करने के बाद बाबा महाकाल निराकार से साकार रूप में दर्शन देते हैं। इस आरती में शामिल होने के लिए श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या उज्जैन की पावन नगरी में पहुंचती है।