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श्री गुरु रविदास जी महाराज की शिक्षाओं का सामाजिक समानता पर प्रभाव

पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने एमिटी यूनिवर्सिटी में आयोजित सेमिनार में श्री गुरु रविदास जी महाराज की शिक्षाओं की प्रासंगिकता पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि गुरु जी की बाणी समानता, मानव गरिमा और सामाजिक न्याय का संदेश देती है। पंजाब सरकार द्वारा स्थापित होने वाले अध्ययन केंद्र का उद्देश्य गुरु जी की शिक्षाओं का शोध और प्रचार-प्रसार करना है। मंत्री ने समाज में समानता और भाईचारे की भावना को मजबूत करने की अपील की।
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पंजाब के वित्त मंत्री का संबोधन

चंडीगढ़/एस.ए.एस. नगर - पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने आज कहा कि श्री गुरु रविदास जी महाराज की पवित्र बाणी समानता, मानव गरिमा, सामाजिक न्याय और सार्वभौमिक भाईचारे का महत्वपूर्ण संदेश देती है, जो आज के समाज में भी अत्यंत प्रासंगिक है।


सेमिनार में विचार

एमिटी यूनिवर्सिटी, मोहाली में ‘श्री गुरु रविदास जी महाराज की बाणी एवं सामाजिक समानता’ विषय पर आयोजित राज्य स्तरीय सेमिनार में उन्होंने कहा कि “गुरु जी महाराज की शिक्षाओं ने जाति, धर्म और सामाजिक स्थिति की सीमाओं को पार करते हुए हर व्यक्ति की अंतर्निहित गरिमा और समानता पर जोर दिया।”


समाज की कल्पना

उन्होंने आगे कहा कि “श्री गुरु रविदास जी महाराज ने एक ऐसे समाज की परिकल्पना की थी, जो समानता, न्याय, करुणा और आपसी सम्मान पर आधारित हो। उनकी बाणी हमें भेदभाव को अस्वीकार करने और समावेशी समाज के निर्माण के लिए प्रेरित करती है, जहां हर व्यक्ति को समान अवसर और सम्मान मिले।”


पंजाब सरकार की पहल

वित्त मंत्री ने पंजाब सरकार की हालिया पहल का उल्लेख करते हुए कहा कि “डेरा बल्लां के फरीदपुरा नौगज़ा में अत्याधुनिक श्री गुरु रविदास जी बाणी अध्ययन केंद्र स्थापित किया जाएगा। यह केंद्र 25 करोड़ रुपये की लागत से बनेगा, जिसमें भूमि की खरीद पर लगभग 11 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। यह केंद्र गुरु जी महाराज की शिक्षाओं के शोध और प्रचार-प्रसार के लिए महत्वपूर्ण होगा।”


गुरु जी महाराज की विचारधारा

श्री चीमा ने गुरु जी महाराज की विचारधारा के सार्वभौमिक स्वरूप को उजागर करते हुए कहा कि “अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, समानता और गैर-भेदभाव जैसे सिद्धांत, जो पश्चिमी देशों में 19वीं शताब्दी में मान्यता प्राप्त करने लगे, वे सिद्धांत गुरु जी महाराज की शिक्षाओं में 650 वर्ष पहले से विद्यमान थे। उनकी दृष्टि अपने समय से बहुत आगे थी और आज भी मानवता को गरिमा और समानता पर आधारित समाज के निर्माण की दिशा में मार्गदर्शन करती है।”


समाज में समानता का संदेश

वित्त मंत्री ने गुरु जी महाराज की शिक्षाओं की प्रासंगिकता पर जोर देते हुए कहा कि “महान गुरु जी महाराज द्वारा दिया गया समानता का संदेश आज के समय में और भी महत्वपूर्ण है। कुछ राजनीतिक ताकतें अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को सीमित कर रही हैं, जो गुरु जी महाराज के समानता और मानव गरिमा के मूल संदेश के विपरीत है।”


भारत की विविधता

उन्होंने भारत की विविधता और सामाजिक सद्भावना के बारे में कहा कि “भारत के लोग विभिन्न धर्मों, जातियों और समुदायों से संबंधित हैं, लेकिन एकता और भाईचारे की भावना किसी भी विभाजनकारी प्रयास को सफल नहीं होने देगी। मैं सभी से अपील करता हूं कि वे गुरु जी महाराज की शिक्षाओं से प्रेरणा लेकर सामाजिक सद्भावना और समानता को मजबूत करें।”


बेगमपुरा की अवधारणा

श्री चीमा ने ‘बेगमपुरा’ की अवधारणा पर चर्चा करते हुए कहा कि “यह आदर्श सामाजिक व्यवस्था का प्रतीक है, जो भेदभाव और असमानता से मुक्त हो। गुरु जी महाराज की बाणी में निहित सिद्धांत एक न्यायपूर्ण और शांतिपूर्ण समाज के निर्माण के लिए मार्गदर्शक हो सकते हैं।”


विद्यार्थियों से आह्वान

उन्होंने विद्यार्थियों और विद्वानों से गुरु जी महाराज की शिक्षाओं का गहन अध्ययन करने का आह्वान किया और कहा कि “शैक्षणिक संस्थानों को महान आध्यात्मिक व्यक्तित्वों की शिक्षाओं पर शोध और संवाद को बढ़ावा देना चाहिए।”


सेमिनार में प्रमुख वक्ता

सेमिनार में प्रमुख वक्ताओं ने भी विचार साझा किए, जिनमें गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी के पंजाबी विभाग के प्रमुख प्रो. मनजिंदर सिंह और तप स्थान श्री गुरु रविदास जी के संत केवल सिंह जी शामिल थे। उन्होंने गुरु जी महाराज की विचारधारा की आधुनिक समाज में प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला।


शैक्षणिक हस्तियों की उपस्थिति

इस अवसर पर एमिटी यूनिवर्सिटी के प्रो-वाइस चांसलर डॉ. पुनीत शर्मा और रजिस्ट्रार डॉ. दलीप कुमार सहित कई प्रमुख शैक्षणिक हस्तियां उपस्थित थीं। डॉ. दलीप कुमार ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत करते हुए सभी योगदानकर्ताओं का आभार व्यक्त किया।


उपस्थित लोग

इस अवसर पर एस.डी.एम. मोहाली श्रीमती दमनदीप कौर और पंजाब के उच्च शिक्षा विभाग के उप निदेशक डॉ. मनीष शर्मा भी उपस्थित थे।