सावन में नवग्रह दोष से मुक्ति के उपाय: शिवलिंग पर जल अर्पित करने के विशेष तरीके
सावन में विशेष जल से शिवलिंग का अभिषेक
सावन में 11 दिनों तक ग्रह के हिसाब से शिवलिंग पर विशेष जल से करें अभिषेक
नवग्रह दोष से मुक्ति पाने के लिए सावन के महीने में शिव जी की आराधना करना लाभकारी हो सकता है। शिवलिंग पर जल अर्पित करते समय कुछ विशेष सामग्री मिलाने से ग्रहों के प्रभाव को कम किया जा सकता है। मान्यता है कि सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु का व्यक्ति के जीवन पर गहरा असर होता है। यदि इनमें से कोई ग्रह कमजोर है, तो इसका प्रभाव जीवन में नकारात्मकता ला सकता है।
यदि आपकी कुंडली में कोई ग्रह कमजोर है, तो सावन में 11 दिनों तक उस ग्रह के अनुसार शिवलिंग पर विशेष जल से अभिषेक करें। इससे ग्रह दोष के प्रभाव में कमी आएगी और जीवन में सुख-समृद्धि आएगी। आइए जानते हैं कि किस ग्रह को मजबूत करने के लिए किस प्रकार का जल अर्पित करना चाहिए।
ग्रह दोष और उनके उपाय
सूर्य दोष
सूर्य को सभी ग्रहों का पिता माना जाता है। यह आत्मविश्वास, ऊर्जा और प्रतिष्ठा का स्रोत है। यदि आपका सूर्य कमजोर है, तो रोजाना शिवलिंग पर जल में लाल चंदन मिलाकर अभिषेक करें। इससे सूर्य की शक्ति में वृद्धि होगी।
चंद्र दोष
चंद्रमा मन और भावनाओं का प्रतीक है। यदि चंद्रमा पीड़ित है, तो रोजाना जल में अक्षत (चावल) मिलाकर शिवलिंग पर चढ़ाएं। इससे भगवान शिव प्रसन्न होते हैं।
मंगल दोष
मंगल साहस और ऊर्जा का कारक है। यदि मंगल कमजोर है, तो मिट्टी के कलश में गुड़ और लाल चंदन मिलाकर शिवलिंग पर अर्पित करें। इससे आपको लाभ होगा।
बुध दोष
बुध बुद्धि और संचार का प्रतीक है। यदि बुध कमजोर है, तो जल में दूर्वा का रस मिलाकर शिवलिंग पर चढ़ाएं। इससे बुध की शक्ति बढ़ेगी।
गुरु दोष
गुरु ज्ञान और समृद्धि का प्रतीक है। यदि गुरु पीड़ित है, तो जल में गेंदे के फूल और हल्दी मिलाकर शिवलिंग और केले के वृक्ष की जड़ में अर्पित करें।
शुक्र दोष
शुक्र सुख-सुविधा और वैवाहिक जीवन से जुड़ा है। यदि शुक्र कमजोर है, तो जल में शक्कर मिलाकर शिवलिंग पर चढ़ाएं। इससे जीवन में सुख आएगा।
शनि दोष
शनि कर्म और अनुशासन का ग्रह है। यदि शनि कमजोर है, तो जल में शक्कर और काले तिल मिलाकर पीपल की जड़ में चढ़ाएं। इससे शनि के प्रभाव से मुक्ति मिलेगी।
राहु दोष
राहु छाया ग्रह है। इसके लिए जल में उड़द डालकर शिवलिंग पर अर्पित करने से लाभ होता है।
केतु दोष
केतु भी छाया ग्रह है। केतु को शांत करने के लिए जल में सप्तधान्य मिलाकर शिवलिंग पर चढ़ाएं। इससे केतु की अशांति दूर होगी।
