सावन में प्रदोष व्रत: जानें कब है पहला व्रत और पूजा का शुभ मुहूर्त
प्रदोष व्रत का महत्व और तिथि
प्रदोष व्रत की तिथि
सावन का महीना विशेष रूप से शिव की आराधना के लिए समर्पित होता है। इस दौरान शिवलिंग पर जल चढ़ाना, व्रत करना और पूजा करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। प्रदोष व्रत हर महीने की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है, और यदि द्वादशी तिथि पर प्रदोष काल आता है, तो भी इसे रखा जाता है। साल में कुल 24 प्रदोष व्रत होते हैं, जिनमें से प्रत्येक महीने में दो व्रत होते हैं।
सावन में प्रदोष व्रत का महत्व और भी बढ़ जाता है। जो भक्त सावन में विधिपूर्वक शिव की पूजा करते हैं, उनकी सभी इच्छाएं पूर्ण होती हैं। आइए जानते हैं कि 2026 में सावन का पहला प्रदोष व्रत कब है और पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है।
पहला प्रदोष व्रत: तिथि और शुभ मुहूर्त
10 अगस्त को प्रदोष व्रत
इस वर्ष सावन का पहला प्रदोष व्रत 10 अगस्त 2026, सोमवार को मनाया जाएगा। यह व्रत सावन के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर है। इस दिन सावन का दूसरा सोमवार व्रत भी है, जिससे यह दिन विशेष रूप से शुभ बनता है।
पूजा का शुभ मुहूर्त
- हिंदू पंचांग के अनुसार, सावन कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि का आरंभ 10 अगस्त, सोमवार को प्रात: 8 बजे होगा।
- यह तिथि 11 अगस्त, मंगलवार को प्रात: 4 बजकर 54 मिनट पर समाप्त होगी।
- प्रदोष व्रत की पूजा का शुभ मुहूर्त: प्रदोष व्रत की पूजा का सबसे शुभ समय 10 अगस्त को शाम 7 बजकर 9 मिनट से रात्रि 9 बजकर 23 मिनट तक है।
- ब्रह्म मुहूर्त: 10 अगस्त को प्रात: 4 बजकर 49 मिनट से 5 बजकर 34 मिनट तक।
- अभिजित मुहूर्त: 10 अगस्त को दोपहर 12 बजकर 18 मिनट से 1 बजकर 9 मिनट तक।
प्रदोष व्रत का महत्व
प्रदोष व्रत का महत्व
हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का फल अलग-अलग होता है। यदि यह व्रत सोमवार को होता है, तो इसे सोम प्रदोष कहा जाता है, और यदि शनिवार को होता है, तो इसे शनि प्रदोष कहा जाता है। इस साल सावन के सोमवार को पड़ने वाला प्रदोष व्रत विशेष रूप से शुभ माना जा रहा है।
इस दिन यदि भक्त श्रद्धा से शिव की पूजा माता पार्वती के साथ करते हैं, तो उनके सभी पाप दूर होते हैं और इच्छाएं पूर्ण होती हैं। यदि कोई व्यक्ति शीघ्र विवाह की इच्छा से यह व्रत करता है, तो उसके लिए उपयुक्त जीवनसाथी के योग बनते हैं।
