सावन शिवरात्रि: महत्व और तिथि की जानकारी
सावन का महीना भगवान शिव की आराधना का विशेष समय है। इस दौरान सावन शिवरात्रि का महत्व अत्यधिक है। जानें इस वर्ष सावन शिवरात्रि कब है, इसके धार्मिक महत्व और जल चढ़ाने के नियम। भक्तजन इस दिन भगवान शिव की पूजा कर अपनी इच्छाओं की पूर्ति की प्रार्थना करते हैं।
| Aug 8, 2026, 11:15 IST
सावन का महीना और भगवान शिव की आराधना
सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित होता है। यह विशेष समय भगवान शिव की पूजा, कांवड़ यात्रा, हरियाली और श्रृंगार से भरा होता है। इस दौरान भक्तजन भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना करते हैं और उनसे अपनी इच्छाओं की पूर्ति की प्रार्थना करते हैं।
सावन शिवरात्रि की तिथि
सावन शिवरात्रि श्रावण मास की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती है। इस वर्ष, यह 11 अगस्त 2026 को होगी। शिवरात्रि की पूजा का समय 4 बजकर 43 मिनट से शुरू होगा और इसका समापन 12 अगस्त को रात 01 बजकर 51 मिनट पर होगा। उदया तिथि और निशिता मुहूर्त के अनुसार, 11 अगस्त को शिवरात्रि का उत्सव मनाना अत्यंत शुभ माना जाता है। विशेष रूप से, 11 अगस्त की मध्यरात्रि को भगवान शिव की पूजा फलदायी मानी जाती है।
सावन शिवरात्रि का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यता के अनुसार, सावन शिवरात्रि के दिन कांवड़िये पवित्र नदियों से गंगाजल लाकर प्रमुख शिव मंदिरों में शिवलिंग पर अर्पित करते हैं। ऐसा माना जाता है कि इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से भगवान शिव की पूजा करने से वे प्रसन्न होते हैं और भक्तों की इच्छाएं पूरी करते हैं। इसके पीछे एक पौराणिक कथा है, जिसमें समुद्र मंथन के समय भगवान शिव ने विष ग्रहण किया था, तब देवताओं ने उन्हें गंगाजल अर्पित किया था।
जल चढ़ाने के नियम
- पूजा के समय पवित्रता का ध्यान रखें।
- जल अर्पित करते समय मुंह उत्तर दिशा में रखें।
- जल अर्पित करते समय 'ॐ नमः शिवाय' या 'बम बम भोले' का जाप करें।
