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2026 कॉमनवेल्थ गेम्स में शूटिंग की अनुपस्थिति: भारत की पदक संभावनाओं पर प्रभाव

2026 के ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में शूटिंग की अनुपस्थिति ने भारत के पदक प्रदर्शन पर चिंता बढ़ा दी है। भारतीय निशानेबाजों ने इस खेल में ऐतिहासिक सफलता हासिल की है, लेकिन अब उन्हें अन्य खेलों में अधिक जिम्मेदारी निभानी होगी। जानें इस विषय पर और क्या कहा जा रहा है और भारतीय शूटिंग की समृद्ध विरासत के बारे में।
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भारत की शूटिंग में ऐतिहासिक सफलता

नई दिल्ली: जब भी कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत की उपलब्धियों की बात होती है, शूटिंग का नाम सबसे पहले आता है। भारतीय निशानेबाजों ने इस प्रतियोगिता में कई वर्षों तक उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है, जिससे देश को सबसे अधिक पदक प्राप्त हुए हैं। फिर भी, 2026 में ग्लासगो में होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स में शूटिंग को शामिल नहीं किया गया है। यह दूसरी बार है जब यह खेल इस प्रतियोगिता से बाहर है, जिससे भारत के पदक अभियान और शूटिंग की समृद्ध परंपरा पर नई बहस छिड़ गई है।


शूटिंग की अनुपस्थिति का कारण

ग्लासगो में 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स की मेज़बानी पहले ऑस्ट्रेलिया के विक्टोरिया राज्य को सौंपी गई थी, लेकिन बढ़ते खर्च के कारण उन्होंने आयोजन से पीछे हटने का निर्णय लिया। इसके बाद, स्कॉटलैंड के ग्लासगो ने कम समय में मेज़बानी का जिम्मा लिया। बजट को सीमित रखने के लिए आयोजकों ने खेलों की संख्या में कमी की, जिसके परिणामस्वरूप शूटिंग को अंतिम सूची से बाहर कर दिया गया, जबकि इसे पहले शामिल किया गया था।


1982 से 2018 तक भारतीय निशानेबाजों की उपलब्धियां

भारत ने पहली बार 1982 के ब्रिस्बेन कॉमनवेल्थ गेम्स में शूटिंग में पदक जीता था। इसके बाद से, भारतीय खिलाड़ियों ने लगभग हर संस्करण में शानदार प्रदर्शन किया है। 2002, 2006 और 2010 के खेलों में भारत ने शूटिंग में रिकॉर्ड संख्या में पदक जीते। विशेष रूप से, 2010 के नई दिल्ली कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत का प्रदर्शन अद्वितीय रहा।


जसपाल राणा का रिकॉर्ड

भारत के सबसे सफल कॉमनवेल्थ खिलाड़ी का रिकॉर्ड निशानेबाज जसपाल राणा के नाम है। उन्होंने 1994 से 2006 के बीच चार कॉमनवेल्थ गेम्स में भाग लिया और कुल 15 पदक जीते, जिनमें 9 स्वर्ण पदक शामिल हैं। उनका प्रदर्शन भारतीय शूटिंग के इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जाती है। हाल ही में उनके निधन के बाद उनकी उपलब्धियों पर फिर से चर्चा हो रही है।


भारत की पदक संभावनाओं पर प्रभाव

कॉमनवेल्थ गेम्स से लगातार दूसरी बार शूटिंग के बाहर रहने का सीधा असर भारत के कुल पदक प्रदर्शन पर पड़ सकता है। यह खेल लंबे समय से भारत के लिए एक विश्वसनीय पदक स्रोत रहा है। ऐसे में, 2026 के ग्लासगो संस्करण में भारतीय दल को अन्य खेलों में अतिरिक्त जिम्मेदारी निभानी होगी। खेल प्रेमियों को भी उस स्पर्धा की कमी महसूस होगी, जिसने भारत को सबसे अधिक अंतरराष्ट्रीय सफलता दिलाई।


कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत का शूटिंग रिकॉर्ड

कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत का शूटिंग रिकॉर्ड

संस्करण प्रदर्शन
1982 ब्रिस्बेन 1 कांस्य (कुल 1 पदक)
1994 विक्टोरिया 3 स्वर्ण, 1 रजत (कुल 4 पदक)
1998 कुआलालंपुर 2 स्वर्ण, 3 रजत, 2 कांस्य (कुल 7 पदक)
2002 मैनचेस्टर 14 स्वर्ण, 7 रजत, 3 कांस्य (कुल 24 पदक)
2006 मेलबर्न 16 स्वर्ण, 7 रजत, 4 कांस्य (कुल 27 पदक)
2010 नई दिल्ली 14 स्वर्ण, 11 रजत, 5 कांस्य (कुल 30 पदक)
2014 ग्लासगो 4 स्वर्ण, 9 रजत, 4 कांस्य (कुल 17 पदक)
2018 गोल्ड कोस्ट 7 स्वर्ण, 4 रजत, 5 कांस्य (कुल 16 पदक)
2022 बर्मिंघम शूटिंग शामिल नहीं थी
2026 ग्लासगो शूटिंग शामिल नहीं है