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अजीत अगरकर का BCCI से विदाई, प्रज्ञान ओझा बने नए चीफ सेलेक्टर

अजीत अगरकर ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) से अपने संबंध समाप्त कर लिए हैं, और प्रज्ञान ओझा को नए अंतरिम चीफ सेलेक्टर के रूप में नियुक्त किया गया है। अगरकर के कार्यकाल में भारतीय टीम ने कई ICC ट्रॉफी जीतीं, लेकिन टेस्ट क्रिकेट में कुछ कठिनाइयों का सामना भी किया। उन्होंने घरेलू क्रिकेट को प्राथमिकता देने के लिए कड़े निर्णय लिए, जिससे खिलाड़ियों की उपलब्धता में सुधार हुआ। रोहित शर्मा की कप्तानी में बदलाव और सूर्यकुमार यादव का टीम से बाहर होना भी चर्चा का विषय रहा। इस लेख में जानें उनके कार्यकाल की प्रमुख उपलब्धियों और चुनौतियों के बारे में।
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अजीत अगरकर का BCCI से नाता खत्म

अजीत अगरकर ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के साथ अपने संबंध समाप्त कर लिए हैं। पूर्व तेज गेंदबाज अब टीम इंडिया के चीफ सेलेक्टर नहीं रहे। उनका कार्यकाल 4 अक्टूबर को समाप्त होना था, लेकिन उन्होंने समय से पहले ही पद छोड़ दिया है। प्रज्ञान ओझा, जो पूर्व खब्बू स्पिनर हैं, को अंतरिम चीफ सेलेक्टर के रूप में नियुक्त किया गया है। ओझा ने मंगलवार (29 सितंबर) को गुवाहाटी में हुई चयन समिति की बैठक की अध्यक्षता की।


अगरकर का कार्यकाल और उपलब्धियां

अगरकर ने जुलाई 2023 में चयन समिति की जिम्मेदारी संभाली थी। उनके तीन साल के कार्यकाल में भारतीय टीम ने तीन महत्वपूर्ण ICC ट्रॉफी जीतीं। सबसे पहले, टीम ने 2024 टी20 वर्ल्ड कप जीतकर खिताबी सूखे को समाप्त किया, इसके बाद अगले वर्ष चैंपियंस ट्रॉफी अपने नाम की। इस साल, टीम ने अपने टी20 वर्ल्ड कप खिताब का सफलतापूर्वक बचाव किया। भारतीय टीम 2023 वनडे वर्ल्ड कप में भी अजेय रही और फाइनल में पहुंची। इसके अलावा, टीम ने दो एशिया कप और एशियन गेम्स में भी स्वर्ण पदक जीते।


चुनौतियाँ और असफलताएँ

हालांकि, अगरकर के कार्यकाल में टीम ने व्हाइट-बॉल क्रिकेट में नई ऊंचाइयों को छुआ, लेकिन टेस्ट क्रिकेट में कुछ कठिनाइयों का सामना भी करना पड़ा। भारतीय टीम को न्यूजीलैंड और दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ घरेलू टेस्ट श्रृंखलाओं में शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा। कीवी टीम ने 2024 के अंत में तीन टेस्ट मैचों की श्रृंखला में भारतीय टीम को हराया, जबकि दक्षिण अफ्रीका ने दो टेस्ट मैचों की श्रृंखला में क्लीन स्वीप किया। इसके अलावा, भारतीय टीम वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) 2023-25 के फाइनल में भी नहीं पहुंच पाई। इन असफलताओं के बावजूद, अगरकर ने कुछ ऐसे निर्णय लिए, जिन्होंने भारतीय क्रिकेट की दिशा को बदल दिया।


घरेलू क्रिकेट को प्राथमिकता

ऑस्ट्रेलिया में बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी में 1-3 की हार के बाद, अगरकर ने कड़े निर्णय लिए। उन्होंने सभी खिलाड़ियों के लिए घरेलू क्रिकेट खेलना अनिवार्य कर दिया। जिन खिलाड़ियों को वर्कलोड प्रबंधन की आवश्यकता थी, उन्हें छूट दी गई, लेकिन बाकी सभी को अपनी घरेलू टीमों के लिए उपलब्ध रहना था। इस निर्णय के बाद, विराट कोहली और रोहित शर्मा जैसे दिग्गज लंबे समय बाद घरेलू क्रिकेट में खेलते नजर आए।


रोहित शर्मा की कप्तानी में बदलाव

रोहित शर्मा की कप्तानी में भारतीय टीम ने मार्च 2025 में चैंपियंस ट्रॉफी जीती थी। इससे पहले, रोहित ने 2024 में टीम को टी20 वर्ल्ड कप चैंपियन बनाया था। 9 महीने के भीतर दो ICC खिताब जीतने के बाद, रोहित की स्थिति मजबूत थी, लेकिन चैंपियंस ट्रॉफी के बाद, जब टीम इंडिया ने अपना पहला वनडे मैच खेला, तो कप्तानी शुभमन गिल को सौंप दी गई। अगरकर की अध्यक्षता वाली चयन समिति ने भविष्य को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया। शुभमन को 2027 वर्ल्ड कप से दो साल पहले वनडे का कप्तान बनाया गया।


सूर्यकुमार यादव का टीम से बाहर होना

बारबाडोस में 2024 टी20 वर्ल्ड कप जीतने के बाद, रोहित ने इस फॉर्मेट से संन्यास ले लिया। उनके बाद, सूर्यकुमार यादव को भारतीय टी20 टीम की कमान सौंपी गई। सूर्या की कप्तानी में टीम ने अजेय प्रदर्शन किया और टी20 वर्ल्ड कप 2026 का खिताब भी जीता। भारतीय टीम घर में टी20 वर्ल्ड कप जीतने वाली पहली टीम बनी। हालांकि, इसके तुरंत बाद, सूर्या को न केवल कप्तानी से हटा दिया गया, बल्कि उन्हें टीम से भी बाहर कर दिया गया। यह निर्णय उनकी खराब फॉर्म के कारण लिया गया, जिस पर काफी चर्चा हुई, लेकिन अगरकर के साहस की सराहना भी की गई।