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बारानिका इलांगोवन ने एशियन गेम्स 2026 में पोल वॉल्ट में भारत को दिलाया पहला पदक

बारानिका इलांगोवन ने एशियन गेम्स 2026 में पोल वॉल्ट स्पर्धा में कांस्य पदक जीतकर भारत के लिए एक नया इतिहास रचा है। 29 वर्षीय एथलीट ने 4.15 मीटर की छलांग लगाई, जो भारत के लिए इस खेल में पहला पदक है। जानें उनकी यात्रा, रिकॉर्ड और इस ऐतिहासिक उपलब्धि के पीछे की कहानी।
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बारानिका इलांगोवन की ऐतिहासिक उपलब्धि

तमिलनाडु की एथलीट बारानिका इलांगोवन ने 29 वर्ष की आयु में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर स्थापित किया है। उन्होंने जापान के आइची-नागोया में चल रहे एशियन गेम्स 2026 में भारत के लिए पोल वॉल्ट स्पर्धा में कांस्य पदक जीता है, जहां भारत को पहले कभी सफलता नहीं मिली थी। शुक्रवार को, उन्होंने 4.15 मीटर की ऊंचाई पर छलांग लगाकर यह पदक अपने नाम किया। यह भारत के लिए एशियन गेम्स में पोल वॉल्ट का पहला पदक है।


पहली भारतीय एथलीट का रिकॉर्ड

बारानिका इलांगोवन एशियन गेम्स, कॉमनवेल्थ गेम्स और ओलंपिक जैसे प्रमुख टूर्नामेंटों में पोल वॉल्ट में पदक जीतने वाली पहली भारतीय एथलीट बन गई हैं। प्रतियोगिता में, उन्होंने 4.25 मीटर की ऊंचाई पार करने का प्रयास किया, लेकिन तीन बार असफल रहीं।


भारत को पोल वॉल्ट में पहला पदक कैसे मिला?

बारानिका ने इस वर्ष भुवनेश्वर में आयोजित नेशनल इंडोर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 4.22 मीटर की छलांग लगाकर नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड स्थापित किया था, जिसमें उन्होंने रोजी मीणा का पुराना रिकॉर्ड तोड़ा। मई में, इंडियन इंडोर ओपन कंबाइंड इवेंट्स एंड पोल वॉल्ट प्रतियोगिता में उन्होंने 4.23 मीटर के साथ अपने ही रिकॉर्ड को सुधारा, लेकिन कुछ समय बाद जी सिंधुश्री ने 4.25 मीटर के साथ यह रिकॉर्ड तोड़ दिया। शुक्रवार के मुकाबले में सिंधुश्री भी शामिल थीं, लेकिन वह कोई वैध छलांग नहीं लगा सकीं।


स्वर्ण और रजत पदक के विजेता

बारानिका ने मई में चेन्नई में इंडियन ओपन एथलेटिक्स सीरीज और रांची में 29वीं नेशनल सीनियर एथलेटिक्स प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीते थे, जहां उन्होंने दोनों बार 4.10 मीटर की छलांग लगाई थी। तीन साल पहले हुए हांगझोऊ एशियन गेम्स के लिए वह क्वालीफाई नहीं कर पाई थीं, लेकिन इस बार उनकी मेहनत रंग लाई। स्वर्ण पदक जापान की मिसाकी मोरोता ने 4.55 मीटर की छलांग के साथ जीता, जबकि चीन की चुंगे नियू ने 4.50 मीटर के साथ रजत पदक प्राप्त किया।


बारानिका का परिचय

बारानिका तमिलनाडु की निवासी हैं और 29 वर्ष की हैं। वह एक साधारण परिवार से आती हैं, जहां उनके पिता किसान और मां गृहिणी हैं। बारानिका ने अपने करियर की शुरुआत लंबी कूद और स्प्रिंटिंग से की, लेकिन कॉलेज के दौरान पोल वॉल्ट को अपनाया। उनके कोच मिल्बर बर्ट्रेंड रसेल ने उन्हें कई वर्षों तक प्रशिक्षित किया और उनकी इस ऐतिहासिक उपलब्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।


भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) के अनुसार, 2020 में एसीएल चोट के बाद लंबे रिहैबिलेशन के दौर से गुजरने के बाद, बारानिका 2023 में भुवनेश्वर स्थित रिलायंस फाउंडेशन हाई परफॉर्मेंस सेंटर से जुड़ीं। निरंतर प्रशिक्षण और रिकवरी के बाद, उन्होंने देश के लिए पहला पदक जीत लिया है।