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नाना पाटेकर का क्रिकेट प्रेम: विराट कोहली के लिए जुनून और यादें

नाना पाटेकर, जो अपनी अदाकारी के लिए मशहूर थे, क्रिकेट के प्रति अपने गहरे प्रेम के लिए भी जाने जाते थे। उन्होंने विराट कोहली को अपना पसंदीदा क्रिकेटर बताया और उनके आउट होने पर खाना न खाने की बात कही। नाना का मानना था कि क्रिकेट और फिल्में दोनों में जनता का फैसला महत्वपूर्ण होता है। उनके क्रिकेट प्रेम की कहानियाँ और बचपन की यादें उनके प्रशंसकों के दिलों में हमेशा जीवित रहेंगी।
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नाना पाटेकर का क्रिकेट के प्रति गहरा लगाव


नई दिल्ली: नाना पाटेकर केवल अपनी बेहतरीन अदाकारी के लिए ही नहीं जाने जाते, बल्कि क्रिकेट के प्रति उनके प्रेम ने भी उन्हें खास बना दिया। उन्होंने कई बार इस खेल के प्रति अपने लगाव के बारे में दिलचस्प किस्से साझा किए हैं। उम्र के बढ़ने के बावजूद, उनका क्रिकेट के प्रति जुनून कभी कम नहीं हुआ। भारतीय टीम के प्रमुख बल्लेबाज विराट कोहली उनके पसंदीदा खिलाड़ियों में से एक थे। एक पुराने साक्षात्कार में, नाना ने अपने बचपन के दिनों को याद करते हुए बताया कि वह क्रिकेट खेला करते थे और उनकी विशेषता ऑफ स्पिन गेंदबाजी थी। उस समय उनके पास क्रिकेट की ट्रेनिंग के लिए पर्याप्त पैसे नहीं थे, इसलिए वह मुंबई के शिवाजी पार्क में जाकर अभ्यास करते थे।


प्रशिक्षण के दौरान सीखे गए सबक

वहां, नेट्स पर अभ्यास कर रहे खिलाड़ियों को गेंदबाजी करके नाना ने अपने खेल को निखारा। उन्होंने बताया कि दूसरों को बॉलिंग करते-करते वह खुद भी सीखते गए। नाना का मानना था कि अगर उन्हें आज भी लगातार 10 दिन अभ्यास करने का मौका मिले, तो वह अच्छी गेंदबाजी कर सकते हैं।


विराट कोहली के प्रति विशेष लगाव

विराट कोहली के आउट होने पर नहीं लगता था खाने का मन


नाना का क्रिकेट प्रेम केवल बचपन की यादों तक सीमित नहीं था। वह भारतीय क्रिकेट को बहुत ध्यान से फॉलो करते थे, खासकर विराट कोहली की बल्लेबाजी को। एक बातचीत में उन्होंने मजाक में कहा था कि अगर विराट कोहली जल्दी आउट हो जाते हैं, तो उन्हें खाना खाने का मन नहीं करता। उनका यह बयान सोशल मीडिया पर काफी चर्चा का विषय बना था।


क्रिकेट और फिल्में: समानताएं

क्रिकेट को जिंदगी से जोड़कर देखते थे


नाना पाटेकर क्रिकेट और सिनेमा में कई समानताएं देखते थे। उनका मानना था कि दोनों क्षेत्रों में अंततः जनता ही निर्णय लेती है। क्रिकेटर को मैदान पर प्रदर्शन करना होता है, जबकि कलाकार को अपनी फिल्म और अभिनय के माध्यम से दर्शकों की कसौटी पर खरा उतरना होता है। नाना के निधन के बाद, उनके प्रशंसक उनकी फिल्मों के साथ-साथ उनके क्रिकेट प्रेम को भी याद कर रहे हैं। उनके लिए क्रिकेट केवल एक खेल नहीं था, बल्कि यह उनके दिल में बसा एक जुनून था।