बिंद्यारानी देवी ने कॉमनवेल्थ गेम्स में जीता ब्रॉन्ज़, चोट से वापसी की प्रेरक कहानी
भारत की वेटलिफ्टर बिंद्यारानी देवी का शानदार प्रदर्शन
नई दिल्ली: भारत की वेटलिफ्टर बिंद्यारानी देवी ने सोमवार को ग्लासगो में चल रहे कॉमनवेल्थ गेम्स में महिलाओं के 58 किलोग्राम वर्ग में ब्रॉन्ज़ मेडल जीता। बर्मिंघम 2022 की सिल्वर मेडलिस्ट बिंद्यारानी ने नई श्रेणी में भी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया और देश के लिए एक और मेडल जोड़ा।
199 किलोग्राम का रिकॉर्ड
58 किलोग्राम के फाइनल में बिंद्यारानी ने कुल 199 किलोग्राम वजन उठाया। उन्होंने स्नैच में 87 किलोग्राम से शुरुआत की और क्लीन एंड जर्क के पहले प्रयास में 112 किलोग्राम सफलतापूर्वक उठाया। हालांकि, अंतिम दो प्रयासों में 116 किलोग्राम उठाने में असफल रहीं।
फिर भी, 199 किलोग्राम के कुल वजन के साथ उन्होंने ब्रॉन्ज़ मेडल सुनिश्चित कर लिया। गोल्ड मेडल नाइजीरिया की रफियातू फोलाशादे लावल ने जीता, जिन्होंने 229 किलोग्राम का गेम्स रिकॉर्ड बनाकर अपना खिताब बरकरार रखा। कनाडा की एन-सोफी ताशेरो ने 215 किलोग्राम के साथ सिल्वर मेडल जीता।
इंफाल से पटियाला तक का सफर
27 जनवरी 1999 को मणिपुर के इंफाल में जन्मी बिंद्यारानी ने अपने करियर की शुरुआत ताइक्वांडो से की थी। 2013 में उन्होंने वेटलिफ्टिंग को चुना। SAI के नॉर्थ ईस्टर्न सेंटर से प्रशिक्षण लेने के बाद वे नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और फिर 2019 में पटियाला के नेशनल कैंप में शामिल हुईं।
2016 में IWLF यूथ नेशनल और 2019 में खेलो इंडिया यूथ गेम्स में गोल्ड जीतकर उन्होंने सुर्खियां बटोरीं। उसी वर्ष कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप में 183 किलोग्राम के साथ पहला बड़ा अंतरराष्ट्रीय खिताब जीता। 2021 में कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप में सिल्वर और वर्ल्ड चैंपियनशिप में 55 किलोग्राम में क्लीन एंड जर्क में गोल्ड भी उनके नाम है।
चोट से वापसी और नए रिकॉर्ड
बर्मिंघम 2022 उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि रही। 55 किलोग्राम में उन्होंने क्लीन एंड जर्क में 116 किलोग्राम का CWG रिकॉर्ड बनाया और कुल 202 किलोग्राम के साथ सिल्वर जीता। 2023 में घुटनों की चोट ने उन्हें परेशान किया, लेकिन उन्होंने 55 किलोग्राम में कुछ समय बिताने के बाद 58 किलोग्राम में वापसी की।
2025 में उनकी जोरदार वापसी हुई। नेशनल गेम्स में उन्होंने 88 किलोग्राम स्नैच करके मीराबाई चानू का नेशनल रिकॉर्ड तोड़ा। इसके साथ ही क्लीन एंड जर्क और टोटल में भी नए रिकॉर्ड बनाए। अहमदाबाद में कॉमनवेल्थ वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में 206 किलोग्राम के बेस्ट टोटल के साथ सिल्वर जीतकर उन्होंने ग्लासगो CWG के लिए अपनी जगह पक्की की।
ग्लासगो का ब्रॉन्ज़ उनकी मेहनत और दृढ़ता की कहानी है। चोट से वापसी, नई श्रेणी में ढलना और फिर मेडल जीतना - बिंद्यारानी ने साबित किया कि मणिपुर की बेटी हार मानना नहीं जानती।
