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ललित मोदी को 16 साल बाद मिली कानूनी राहत, आईपीएल विवाद का अंत

ललित मोदी को 16 साल बाद आईपीएल विवाद में कानूनी राहत मिली है। अपीलीय ट्रिब्यूनल ने उन पर लगे जुर्माने को रद्द कर दिया और ED की दलीलें खारिज कर दीं। मोदी ने इसे न्याय की जीत बताया और कहा कि उन्होंने हमेशा क्रिकेट के हित में काम किया। जानें इस मामले की पूरी कहानी और मोदी का क्या कहना है।
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ललित मोदी को मिली बड़ी कानूनी राहत


नई दिल्ली: पूर्व आईपीएल चेयरमैन ललित मोदी को लगभग 16 वर्षों के बाद एक महत्वपूर्ण कानूनी राहत मिली है। 2009 में दक्षिण अफ्रीका में हुए आईपीएल से संबंधित मामले में अपीलीय ट्रिब्यूनल ने उनके खिलाफ लगाए गए जुर्माने को रद्द कर दिया। इसके साथ ही, प्रवर्तन निदेशालय (ED) की उस दलील को भी खारिज कर दिया गया, जिसमें विदेशी धन हस्तांतरण को 'कैपिटल अकाउंट ट्रांजैक्शन' बताया गया था।


16 साल पुराना मामला समाप्त

यह मामला 2009 में आईपीएल के दूसरे सीजन के दक्षिण अफ्रीका में आयोजन से जुड़ा था। इस मामले की जांच और कानूनी प्रक्रिया लगभग 16 वर्षों तक चली। अब ट्रिब्यूनल ने अपने निर्णय में कहा कि संबंधित विदेशी रेमिटेंस 'करंट अकाउंट ट्रांजैक्शन' की श्रेणी में आते हैं, इसलिए उन पर लगाए गए आरोप सही नहीं पाए गए।


ED की दलीलें खारिज

सुनवाई के दौरान ट्रिब्यूनल ने यह भी स्पष्ट किया कि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) द्वारा विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के नियमों का पालन करना ललित मोदी की व्यक्तिगत जिम्मेदारी नहीं थी। इसके अलावा, उन्हें ऐसे वित्तीय अधिकार भी नहीं दिए गए थे, जैसा कि जांच एजेंसी ने दावा किया था। इसी आधार पर ट्रिब्यूनल ने उन पर लगाए गए जुर्माने को रद्द कर दिया और उन्हें इस मामले में राहत दी।


ललित मोदी का स्वागत

फैसले के बाद ललित मोदी ने इसे आईपीएल 2009 से जुड़े सबसे महत्वपूर्ण कानूनी विवाद का अंत बताया। उन्होंने कहा कि उन्होंने हमेशा भारतीय क्रिकेट और आईपीएल के हित में काम किया और किसी भी प्रकार का निजी लाभ लेने या गलत काम करने का इरादा नहीं था।


उन्होंने यह भी कहा कि उस समय भारत में आम चुनाव होने के कारण आईपीएल का आयोजन दक्षिण अफ्रीका में करना मजबूरी थी। यदि ऐसा निर्णय नहीं लिया जाता, तो टूर्नामेंट का आयोजन संभव नहीं हो पाता।


'सच और कानून की जीत'

ललित मोदी ने कहा कि उन्होंने पूरे मामले में कानूनी प्रक्रिया का पालन किया और जांच में सहयोग किया। उन्हें हमेशा विश्वास था कि अंत में कानून और तथ्यों के आधार पर ही फैसला आएगा। उन्होंने इस निर्णय को केवल अपनी व्यक्तिगत जीत नहीं, बल्कि निष्पक्ष न्यायिक प्रक्रिया और सबूतों के महत्व की जीत बताया। इसके साथ ही, उन्होंने कहा कि अब वह इस अध्याय को पीछे छोड़कर खेल, कारोबार और समाजसेवा के क्षेत्र में आगे बढ़ने पर ध्यान देंगे।