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निशा दहिया: चोटों से जूझते हुए नई सोच के साथ एशियन गेम्स में उतरेंगी

निशा दहिया, जो चोटों के कारण कई बार निराश हुई हैं, अब नई मानसिकता के साथ एशियन गेम्स में भाग लेने के लिए तैयार हैं। उन्होंने अपने करियर में आई बाधाओं को स्वीकार किया है और अब केवल अपने प्रदर्शन पर ध्यान केंद्रित करने का निर्णय लिया है। पेरिस ओलंपिक में चोट के कारण मेडल का सपना टूटने के बाद, निशा ने समझा है कि भाग्य पर नियंत्रण नहीं होता। जानें उनकी प्रेरणादायक कहानी और आगामी लक्ष्यों के बारे में।
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निशा दहिया की नई मानसिकता

निशा दहिया को बार-बार चोट लगने के बाद यह सवाल सताता था कि उनके साथ ऐसा क्यों हो रहा है। जब सब कुछ सही दिशा में चल रहा था, तब शरीर ने साथ क्यों नहीं दिया? जिस प्रतियोगिता में उन्हें अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद थी, वहां निराशा का सामना करना पड़ा। अब, निशा ने असफलताओं को स्वीकार करना सीख लिया है और चोटों के बारे में शिकायत करना बंद कर दिया है।


पेरिस ओलंपिक के बाद मिली सीख

पेरिस ओलंपिक में चोट के कारण मेडल का सपना टूटने के बाद, निशा ने समझा कि वह अपने प्रयासों पर नियंत्रण रख सकती हैं, परिणामों पर नहीं। इस मानसिक बदलाव के साथ, वह एशियन गेम्स में भाग लेने के लिए तैयार हैं। विमेंस 68 किग्रा वर्ग में प्रतिस्पर्धा करते हुए, उनका ध्यान केवल अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन पर होगा।


निशा का भाग्य और मेहनत

निशा ने मीडिया से कहा, 'पहले मुझे लगता था कि भगवान मेरे साथ अन्याय कर रहे हैं। अब मैं समझ गई हूं कि मुझे वही मिलेगा जो मेरे भाग्य में है। मैं केवल अपने काम पर ध्यान दूंगी और मेहनत करूंगी।'


उन्होंने आगे कहा, 'मेरे करियर में कई बार मैंने लीड हासिल की है, लेकिन परिणाम हमेशा मेरे पक्ष में नहीं रहे। वर्ल्ड चैंपियनशिप 2022 में लिंडा मोराइस के खिलाफ 4-0 की बढ़त के बावजूद, मुझे हार का सामना करना पड़ा।'


चोटों का प्रभाव

पेरिस ओलंपिक 2024 में, निशा ने क्वार्टर-फाइनल में 8-1 की बढ़त बनाई थी, लेकिन चोट के कारण उन्हें हार का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा, 'परिणाम हमारे हाथ में नहीं होते। कभी-कभी मुकाबला अनुकूल होता है, कभी दबाव में आ जाते हैं। चोटें किसी के नियंत्रण में नहीं होतीं।'


निशा ने कहा, 'जब आप अच्छे अभ्यास में होते हैं, तो सब कुछ सही चलता है, लेकिन चोट सब कुछ बिगाड़ देती है। अब मैंने शिकायत करना और अतीत में जीना छोड़ दिया है।'


भविष्य की ओर ध्यान

निशा ने कहा, 'अगर आप अतीत में खोए रहेंगे, तो आगे नहीं बढ़ पाएंगे। मुझे लॉस एंजेलिस ओलंपिक में खेलना है और मेडल जीतना है। इसके लिए मुझे छोटी-छोटी चीजों को पीछे छोड़ना होगा।'


उनका मानना है कि उनकी ताकत उनका आक्रामक खेल और आत्मविश्वास है। WFI द्वारा नियुक्त जापानी कोच कोसेई अकाइशी के साथ काम करने से उनके कौशल में नयापन आया है। उन्होंने कहा, 'उनकी तकनीकें हमारे लिए नई हैं और इससे मुझे बेहतर पहलवान बनने में मदद मिल रही है।'