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भारत ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में झंडू कुमार के साथ खोला पदक खाता

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत ने झंडू कुमार के माध्यम से अपना पहला पदक जीता है। उन्होंने 190 किलोग्राम की लिफ्ट के साथ ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया। इस लेख में जानें कि अन्य देशों ने कितने पदक जीते हैं और पदक तालिका में कौन सा देश शीर्ष पर है। झंडू कुमार की भावनाएँ और उनकी सफलता की कहानी भी यहाँ प्रस्तुत की गई है।
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भारत का पहला पदक कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में

23 जुलाई 2026 से स्कॉटलैंड के ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत ने अपना पहला पदक हासिल कर लिया है। यह उपलब्धि बिहार के पैरा पावरलिफ्टर झंडू कुमार ने 190 किलोग्राम की बेहतरीन लिफ्ट के साथ 130.9 अंक प्राप्त कर पुरुष हेवीवेट वर्ग में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर हासिल की। इस बहु-खेल आयोजन में विभिन्न देशों के एथलीटों ने स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक जीतने में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है।


इससे पहले, पुरुष और महिला लाइटवेट पैरा पावरलिफ्टिंग में भारत पदक जीतने में असफल रहा था। लेकिन अब भारत का खाता खुल चुका है। आइए जानते हैं कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में किन खिलाड़ियों ने पदक जीते हैं और कौन से देश पदक तालिका में आगे हैं।


पदक तालिका में शीर्ष पर कौन?

पदक तालिका में कौन से देश चल रहे हैं आगे?


ऑस्ट्रेलिया ने अब तक शानदार प्रदर्शन करते हुए 6 स्वर्ण, 2 रजत और 5 कांस्य पदक के साथ कुल 13 पदक जीतकर पहले स्थान पर है। नाइजीरिया 3 स्वर्ण और 3 रजत के साथ 6 पदक लेकर दूसरे स्थान पर है, जबकि पैरा पावरलिफ्टिंग में नाइजीरिया के एथलीटों ने बेहतरीन प्रदर्शन किया है। मेज़बान स्कॉटलैंड तीसरे स्थान पर है, जिसके खाते में 2 स्वर्ण और 2 रजत हैं।


इंग्लैंड के पास कुल 8 पदक हैं, लेकिन केवल 1 स्वर्ण होने के कारण वह चौथे स्थान पर है। ध्यान दें कि राष्ट्रमंडल खेलों में रैंकिंग स्वर्ण पदकों की संख्या के आधार पर निर्धारित होती है। कनाडा, दक्षिण अफ्रीका, न्यूजीलैंड, वेल्स और भारत ने भी शुरुआती मुकाबलों में पदक जीते हैं।


भारत ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में झंडू कुमार के साथ खोला पदक खाता


झंडू कुमार की भावनाएँ

झंडू कुमार की सफलता, भारत का खुला खाता


भारत के लिए अब तक का एकमात्र पदक झंडू कुमार ने जीता है। इस उपलब्धि के बाद वह बेहद भावुक नजर आए। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा, 'मुझे ऐसा लग रहा है जैसे मैं उड़ रहा हूं। यह मेरा पहला मेडल है। पूरे मुकाबले के दौरान मेरे दिमाग में सिर्फ एक ही बात चल रही थी कि मुझे मेडल जीतना है। बस जीतना है।' झंडू कुमार ने यह भी कहा कि यह पदक उनके लिए केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि उन सभी लोगों की मेहनत का परिणाम है जिन्होंने उनके सफर में हर कदम पर उनका साथ दिया।